काशी से धर्म के कालनेमियों के खिलाफ शंखनाद, जगद्गुरु निग्रहाचार्य स्वामी भागवतानन्दगुरु का भव्य अभिनंदन

Shri Kashi Vidwat Dharm Parishad

Varanasi News: बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ की पावन नगरी इस समय सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एक बड़े वैचारिक आंदोलन की गवाह बन रही है। श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास द्वारा संस्थापित श्रीकाशीविद्वद्धर्म परिषद् ने काशी के मूर्धन्य विद्वानों, संतों और महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति में एक भव्य अभिनंदन समारोह का आयोजन किया।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सनातन धर्म की मर्यादा और शास्त्रों की रक्षा के लिए अनवरत संघर्ष करने वाले हंसवंशावतंस महामहिम विद्या मार्तण्ड जगद्गुरु निग्रहाचार्य स्वामी भागवतानन्द गुरु का भव्य अभिनंदन पत्र और अंगवस्त्र प्रदान कर वंदन किया गया। परिषद् ने इस सम्मान के जरिए समाज को दिग्भ्रमित करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुटता का एक बुलंद शंखनाद किया है।

धर्म ध्वजा थामे ‘कालनेमी’ समाज को कर रहे गुमराह

अभिनंदन समारोह का मंच संचालन कर रहे मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य न्यासी व जम्मू-कश्मीर प्रांत के गुरुकुल एवं मंदिर सेवा योजना प्रमुख डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने तथाकथित विद्वानों और संतों पर तीखा हमला बोला।

डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय का बड़ा बयान: आज धर्म का चोला ओढ़कर कुछ तथाकथित विद्वान और संत समाज को भटकाने का निंदनीय प्रयास कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए घातक है। अब समय आ गया है कि समाज को दिग्भ्रमित करने वाले इन कालनेमियों को पहचानकर उन्हें सही मार्ग पर लाया जाए, वरना हमारी आने वाली पीढ़ी को इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ेगा। परिषद् धर्म की रक्षा के लिए जगद्गुरु स्वामी भागवतानन्दगुरु के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

भगवान वेद व्यास को ब्राह्मणेतर बताने की साजिश नाकाम

परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व मीमांसा विभाग के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी ने काशी की अन्य संस्थाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कई परिषदों का दायरा केवल सत्ता और धन की लोलुपता तक सिमट गया है। उन्होंने खुलासा किया कि पिछले दिनों कुछ तथाकथित विद्वानों ने भगवान वेद व्यास को ब्राह्मणेतर (ब्राह्मण से अलग) घोषित करने की ओछी कोशिश की थी, जिसका परिषद् ने कड़ा प्रतिवाद किया और एक लघु ग्रंथ के रूप में इसका अकाट्य शास्त्रोक्त समाधान समाज के सामने रखा।

वहीं, परिषद् के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. सुधाकर मिश्र ने साफ किया कि देश में चल रही धार्मिक समस्याओं के ठोस और शास्त्रीय समाधान के लिए ही इस परिषद् की स्थापना वरिष्ठ विद्वानों के परामर्श से की गई है, जो केवल बोलने में नहीं बल्कि सेवा भाव से काम करने में विश्वास रखती है। कार्यक्रम के दौरान प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने अभिनंदन पत्र का वाचन कर शास्त्रीय पद्धति से महाराज जी का गुणगान किया।

Shri Kashi Vidwat Dharm Parishad

मोटी दक्षिणा के लिए अपसिद्धांतों को प्रमाणित कर रहे लोभी पंडित: जगद्गुरु

अपने अभिनंदन से गदगद जगदगुरु निग्रहाचार्य स्वामी भागवतानन्द गुरु ने अपने संबोधन में काशी की गरिमा को धूमिल करने वाले तत्वों और अक्षर पुरुषोत्तम संस्था पर नाम लेकर सीधा और बड़ा प्रहार किया। जगद्गुरु ने कहा कि दो-दो ब्रह्म को अपने भाष्य ग्रंथ में स्थापित करने वाले और मार्ग से भटके भद्रेश दास को काशी की कुछ परिषदों के भाट विद्वानों द्वारा महामहोपाध्याय की उपाधि दी जा रही है।

5000 प्रतियों का वितरण: स्वामी ने बताया कि भद्रेश दास के गलत सिद्धांतों का खंडन काशी के प्रकांड विद्वान पंडित कमलाकांत त्रिपाठी ने पंक्ति-दर-पंक्ति किया है। मौनी बाबा ट्रस्ट ने इसके खिलाफ ‘अपसिद्धांतनिरास’ नामक ग्रंथ की 5,000 प्रतियां प्रकाशित कर प्रयागराज महाकुंभ में सभी धर्माचार्यों के मंचों पर वितरित की थीं।

लोभी पंडितों का बहिष्कार हो: उन्होंने कहा कि ऐसे ढीठ और लोभी पंडित मोटी दक्षिणा के चक्कर में गलत भाष्यों को उत्कृष्ट बता रहे हैं। अगर मौनी बाबा ट्रस्ट इस परिषद् की स्थापना न करता, तो ये ‘निशाचर’ बड़ा अनर्थ कर देते।

नेपोटिज्म पर भी बरसे जगद्गुरु

स्वामी जी ने कड़े शब्दों में कहा, हमें ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना होगा जो परिषद् के बड़े पदों पर बैठकर अपनी पत्नी, भतीजे और रिश्तेदारों को महाविद्यालयों में नियुक्त करवाकर संस्कृत का सर्वनाश कर रहे हैं। जब-जब समाज में ऐसी विकृति आएगी, हम सब मिलकर इसे कुचल देंगे।

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वैदिक जयघोष से झंकृत हुई सभा

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण, द्वीप प्रज्वलन और श्रीरघुनाथ जी के चरणों में पुष्प अर्पित करके किया गया, जिससे पूरी सभा वैदिक मंत्रों के जयघोष से झंकृत हो उठी। अंत में परिषद् के मंत्री पंडित उमंग नाथ शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर परिषद् के उपाध्यक्ष पं. रामप्रिय पाण्डेय, कार्यालय मंत्री पं. दुर्गेश पाठक, संगठन मंत्री पं. संजय त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष पं. आशीष मणि त्रिपाठी, वरिष्ठ विद्वान चल्ला सुब्बाराव, माता चिदानंदमयि, विपिन पाठक, परामर्शदात्री समिति के डॉ. अच्युत कृष्ण त्रिपाठी, डॉ. विश्वेश्वरदेव प्रसाद मिश्र, शिवानंद तिवारी, अनुग्रह उपाध्याय सहित 200 से अधिक गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे।

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