श्रीमद्भागवत कथा का भक्तिमय विश्राम, स्वामी शिवाधर दुबे महाराज ने रुक्मिणी विवाह को बताया समर्पण का आदर्श

Shrimad Bhagwat Katha Panipat

पानीपत (विकासनगर): हरियाणा के पानीपत स्थित विकासनगर में पूज्य स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज के पावन सान्निध्य में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के वातावरण में हुआ। कथा के पावन विश्राम के अवसर पर एक भव्य और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

अडिग विश्वास से ही मिलते हैं भगवान श्रीकृष्ण

समापन सत्र के दौरान भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज ने रुक्मिणी-विवाह प्रसंग की दिव्य व्याख्या की। उन्होंने कहा, रुक्मिणी जी का विवाह केवल एक पौराणिक कथा मात्र नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, निष्काम प्रेम और पूर्ण आत्म-समर्पण का एक जीवंत उदाहरण है। देवी रुक्मिणी ने अपनी अखंड भक्ति और दृढ़ विश्वास के बल पर साक्षात भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त किया था। महाराज ने आगे कहा कि जब एक भक्त का विश्वास भगवान के चरणों में अडिग हो जाता है, तो उसके जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी स्वतः समाप्त हो जाती हैं। आज के आधुनिक समाज को धर्म, सदाचार, अच्छे संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना की सबसे ज्यादा जरूरत है।

Shrimad Bhagwat Katha Panipat

सुदामा चरित्र सुन भावुक हुए श्रद्धालु

कथा के अंतिम दिन प्रख्यात कथावाचिका आंचल मिश्रा ने सुदामा चरित्र और श्रीकृष्ण-सुदामा की निश्छल मित्रता का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। उनके ओजस्वी और मधुर भजनों व प्रसंगों को सुनकर पंडाल में उपस्थित सभी भक्तों की आँखें नम हो गईं और पूरा माहौल भक्ति के रस में सराबोर हो गया।

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उत्सव के सफल समापन पर स्वामी ने इस धार्मिक अनुष्ठान में अपना योगदान देने वाली मातृशक्ति, युवाओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों का सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व वार्ड एमसी रामचंद्र कदयान, माँ-बेटा कीर्तन मंडली परिवार और समस्त विकासनगर वासियों के सेवा भाव और समर्पण की सराहना की।

महाराज ने संदेश दिया कि कोई भी धार्मिक या सामाजिक कार्य किसी एक व्यक्ति के पुरुषार्थ से नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक आस्था और सहयोग से सफल होता है। अंत में उन्होंने भगवान राधा-कृष्ण से सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हुए अपना शुभाशीष प्रदान किया।

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