Commonwealth Games 2026: 15 मिनट में भारत को मिले 2 गोल्ड, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में रचा इतिहास
Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Glasgow CWG) में शुक्रवार का दिन भारतीय खेलों के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत की 23 वर्षीय जांबाज एथलीट अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो इवेंट में स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
त्रिपुरा की रहने वाली अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो खेल के अंदर स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं। अस्मिता के इस ऐतिहासिक कारनामे के महज 15 मिनट के भीतर पुरुष वर्ग में हर्ष सिंह ने भी जूडो का गोल्ड मेडल अपने नाम कर खुशी को दोगुना कर दिया।
Asmita Dey won the first ever Judo Gold Medal for India at Commonwealth Games! 🔥🥳#CommonwealthGames #AshmitaDey pic.twitter.com/xp6Dii6gPM
— தங்கத்தளபதி✨ (@Thaniraman_) July 31, 2026
15 मिनट के अंदर ऐतिहासिक डबल गोल्ड
ग्लासगो में शुक्रवार को भारतीय फैंस को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी कल्पना हर खेल प्रेमी कर रहा था। अस्मिता ने महिलाओं की 48 किग्रा कैटेगरी के फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वाच को बेहद कड़े और रोमांचक मुकाबले में 2-1 से हराकर इतिहास रचा। अस्मिता के पोडियम पर शीर्ष पर पहुंचने के मात्र 15 मिनट बाद ही मेंस जूडो फाइनल में हर्ष सिंह ने धमाकेदार जीत दर्ज करते हुए भारत की झोली में एक और गोल्ड डाल दिया।
अस्मिता डे: साइकिल मैकेनिक की बेटी से जूडो क्वीन बनने का सफर
शुरुआती जीवन और पृष्ठभूमि: दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता एक साइकिल मैकेनिक हैं। तमाम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अस्मिता ने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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एथलेटिक्स से जूडो का रुख: शुरुआत में अस्मिता 800 मीटर रेस (एथलेटिक्स) में भाग लेती थीं। हालांकि, अपने पहले कोच के मार्गदर्शन में उन्होंने जूडो को समझा और 2015 में ‘त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल’ से जुड़ गईं।
खेलो इंडिया और SAI का साथ: नेशनल स्कूल गेम्स और ‘खेलो इंडिया’ में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें 2018 में SAI रीजनल सेंटर, भोपाल (NCOE) में ट्रेनिंग का मौका मिला।
अस्मिता ने इससे पहले एशियन ओपन, जूनियर एशिया कप जूडो चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भी भारत के लिए मेडल जीते हैं। त्रिपुरा के एक छोटे से शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम के शीर्ष तक पहुंचने का अस्मिता का यह सफर देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
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