श्री शिव गुरुकुल स्वाध्याय केन्द्र में बटुक यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न, स्वामी शिवाधर दुबे महाराज ने दिया सनातन चेतना का संदेश
Spiritual News: पूर्णिमा के पावन पर्व पर श्री शिव गुरुकुल स्वाध्याय केन्द्र में ‘बटुक यज्ञोपवीत संस्कार’ अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। पूर्णिमा की धवल चांदनी के समान ही इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रवाहित हुई संस्कार-गंगा ने सनातन चेतना और सामाजिक समरसता की एक अलौकिक अलख जगाई।
ऋषिकुल परंपरा का संवाहक बनता बालक
अनुष्ठान के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जब एक बालक घर-आंगन का मोह छोड़कर गुरुकुल के सानिध्य में आता है, तो वह हमारी महान ऋषिकुल परंपरा का वाहक बन जाता है। आधुनिक भौतिकवादी दौर में बटुक ब्राह्मणों को दिए जाने वाले ये संस्कार बच्चों को धर्म, सदाचार और सेवा मार्ग से जोड़ते हैं, जिससे सशक्त और जगद्गुरु भारत का निर्माण संभव है।

निष्पाप बटुकों में साक्षात ईश्वर का वास: स्वामी शिवाधर दुबे महाराज
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज जी ने ओजस्वी संदेश दिया। उन्होंने कहा, जब कोई बालक माता-पिता के स्नेह-बंधन से आगे बढ़कर धर्म और वेद की शरण में आता है, तो संपूर्ण सृष्टि उसका स्वागत करती है। इन निष्पाप बटुकों के चरणों में साक्षात ईश्वर विराजते हैं। जो समाज इन बालकों को संस्कारित करता है और इनकी सेवा करता है, वह अनंत पुण्यों का भागीदार बनता है। स्वामी जी के इन मर्मस्पर्शी विचारों ने उपस्थित जन-समूह को श्रद्धा से भावविभोर कर दिया।
वात्सल्य और समर्पण की मिसाल बने सांगवान परिवार
इस दिव्य अनुष्ठान में सांगवान एवं रेनू चौधरी का निस्वार्थ सहयोग आकर्षण का केंद्र रहा। रेनू चौधरी ने अपने कर-कमलों से सभी बटुकों को वस्त्र एवं अंगवस्त्र भेंट किए। उनके इस मातृवत दुलार और सांगवान जी के धर्म-कार्यों के प्रति समर्पण को देखते हुए स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज जी ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।

पूज्य आचार्यों के मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर
वैदिक रीति-रिवाज से अनुष्ठान को संपन्न कराने में आचार्य संदीप दत्त गौतम, आचार्य अनुज दीक्षित एवं आचार्य श्याम वशिष्ठ का अतुलनीय योगदान रहा। आचार्यों के मुखारविंद से गूंजते सामगान और वैदिक मंत्रों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। आचार्यों ने भी सांगवान जी व रेनू चौधरी जी के सेवा-भाव की मुक्तकंठ से सराहना की। यह आयोजन समाज को अपने बच्चों में उत्तम संस्कार रोपित करने, गुरुजनों का आदर करने और भारत भूमि की सेवा के लिए समर्पित रहने का एक युग-दृष्टा संदेश देकर संपन्न हुआ।
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