जंतर-मंतर हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने तोड़ी चुप्पी, बोले- हमलावर छात्र नहीं, असामाजिक तत्व थे
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने नया मोड़ ले लिया है। घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पीड़ा साझा की और इंसाफ की मांग की। परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन में छात्र नहीं बल्कि असामाजिक तत्व शामिल थे, जिन्होंने पुलिस पर पत्थर, जूते-चप्पल और गमलों से हमला किया। इस हिंसा में 5 IPS अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 60 प्रदर्शनकारी भी जख्मी हुए। परिजनों ने संसद में पुलिसकर्मियों के मुद्दे उठाने की गुहार लगाई है।
घायल एसीपी के बेटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके पिता ने उन्हें बताया था कि प्रदर्शन में शामिल लोग छात्र नहीं लग रहे हैं। उन्होंने कहा, मेरे पिता फ्रंट लाइन बैरिकेड्स पर तैनात थे। जब भी वह रात में घर आते थे, तो कहते थे कि अब ये प्रोटेस्ट स्टूडेंट्स का नहीं लग रहा, इसमें असामाजिक तत्व घुस गए हैं। अगले ही दिन वह हिंसा में घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती थे। उनकी वर्दी खून से लाल थी और उन्हें 4 टांके लगे।
पिता को सोशल मीडिया पर क्रिमिनल बताया जा रहा
कुंजल नाम के युवक, जिनके पिता सब-इंस्पेक्टर हैं, ने बताया कि उनके पिता को सोशल मीडिया पर अपराधी करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर मेरे पिता को ही क्रिमिनल बता रहे हैं और अपने क्राइम को खत्म करने के लिए कोर्ट जा रहे हैं। हम सुप्रीम कोर्ट गए, एडवोकेट से अनुरोध किया और हमारी बात सुप्रीम कोर्ट में रखी गई। हमें भरोसा दिलाया गया कि हमारे भी अधिकार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेटिंग को तोड़ दिया।
दिल्ली पुलिस के परिवार को सुनिए pic.twitter.com/KM9OITsCgb
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) July 31, 2026
एएसआई की पत्नी ने सुनाई दर्दनाक दास्तान
सीमा नामक महिला, जिनके पति दिल्ली पुलिस में एएसआई हैं, ने बताया कि 20 जुलाई को उनके पति की ड्यूटी जंतर-मंतर पर थी। उन्होंने कहा, सुबह 11 बजे उन्होंने फोन पर बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे हैं। शाम 7 बजे जब मैंने फोन किया तो पता चला कि वह एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हैं। भीड़ उग्र हो गई थी और उनमें शरारती तत्व शामिल हो गए थे।
उन्होंने आगे बताया, पुलिस फोर्स पर गमलों, जूतों और पत्थरों से हमला किया गया। मेरे पति का हेलमेट पूरी तरह टूट गया। अगर पत्थर सीधा लगता तो वह दुनिया में नहीं होते। उन्होंने संसद में बैठे प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा, पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बारे में भी संसद में बात रखी जाए। 20 जुलाई के बाद से यही नैरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन यह सच नहीं है। प्रदर्शन का दूसरा पहलू कुछ और ही है।
परिजनों ने की इंसाफ की मांग
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने एक स्वर में कहा कि पुलिसकर्मी भी देश के नागरिक हैं और उनके भी अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि जो पुलिसकर्मी संसद की सुरक्षा में लगे रहते हैं, उनके मुद्दों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। परिजनों का कहना था कि प्रदर्शन के दौरान केवल एक पक्ष दिखाया जा रहा है, जबकि पुलिस पर हुए हमले को नजरअंदाज किया जा रहा है।
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5 IPS समेत 180 पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी हुए घायल
बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस झड़प में 5 IPS अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 60 प्रदर्शनकारी भी जख्मी हुए। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था और मामला अदालतों में भी पहुंच चुका है। अब घायल जवानों के परिजनों ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखकर इस मामले को नया आयाम दे दिया है।
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