पुष्कर में शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ संपन्न, विश्व शांति और आतंकवाद शमन के संकल्प ने बनाए 11 विश्व रिकॉर्ड
पुष्कर: वैश्विक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा के संचार, विश्व संतुलन एवं शांति के लिए आयोजित शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का 8 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक लगातार 43 दिनों तक भव्य आयोजन संपन्न हो गया। यह ऐतिहासिक यज्ञ तीर्थगुरु श्री पुष्करराज में महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।
विश्वशांति, आतंकवाद शमन तथा समस्त विश्व को सनातनी बनाने के संकल्प से आयोजित इस महायज्ञ ने अपनी सिद्धि प्राप्त कर ली है। यह महायज्ञ कलिकाल का प्रथम याज्ञिक महाप्रयोग है, जो सतयुग के बाद पहली बार पूर्ण वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ। आजकल अनेक यज्ञ तो हो रहे हैं, लेकिन उनमें अधिकतर वैदिक विधि-विधान का पालन किए बिना केवल पाखंड का पोषण हो रहा है, जो अत्यंत दुखद है।
वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ अद्वितीय आयोजन
यह महायज्ञ भगवती के उपासक स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज की देख-रेख में एवं काशी के मूर्धन्य विद्वानों के परामर्श से किया गया। प्रत्येक विधि एवं व्यवस्था पर सूक्ष्मता से विचार करने के बाद यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि बिना त्रिकालिक संध्या-गायत्रीनिष्ठ ब्राह्मणों के संसार का कल्याण संभव नहीं है।

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस महायज्ञ को वैश्विक पटल पर लाने के लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसका नाम है “सनातन वैदिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि उत्थान समिति” (संस्थापित – श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास)। यद्यपि इस समिति का कार्य पूर्ण रूप से गोपनीय रखा गया था, लेकिन समिति ने जो कार्य करके दिखाया, उससे समस्त विश्व को ज्ञात हो गया कि एक विप्र क्या कर सकता है।
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11 विश्व रिकॉर्ड बनाने में हुई सफलता
शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ ने अपने वैश्विक संकल्प से सिद्धि प्राप्त करते हुए विश्व में कुल 11 रिकॉर्ड बनाए। इस अवसर पर समिति के संरक्षक प्रो. कमलाकांत त्रिपाठी, अध्यक्ष डॉ. रामप्रिय पांडेय, उपाध्यक्ष श्री हर्ष पाराशर, श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी गुरु शिवाधर दुबे महाराज, महामंत्री डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय एवं कार्यालय मंत्री अनुष्का भट्ट सहित भारत सरकार के निवर्तमान मंत्री अश्विनी कुमार चौबे एवं स्वामी दयानंद शास्त्री ने विश्व रिकॉर्ड के प्रमाण पत्र एवं मेडल यज्ञ के संकल्पकर्ता महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर महाराज को प्रदान कर अभिनंदन किया।

11 विश्व रिकॉर्ड्स की सूची
उत्कृष्टता का विश्व कीर्तिमान सम्मान – इंग्लैंड (लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स)
कलिकाल का प्रथम दिव्य याज्ञिक महाप्रयोग – वैदिक विधि-विधान द्वारा अनुष्ठित शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ
त्रैकालिक संध्या-गायत्री तत्पर विप्रों द्वारा सर्वाधिक 27 करोड़ गायत्री मंत्र का जप – पूर्ण संपन्न
अब तक की सर्वाधिक दीर्घकालिक (43 दिन) साधना-श्रृंखला – निरंतरता का अद्वितीय समन्वय
आतंकवाद शमन, विश्वकल्याणार्थ एवं सनातन वैदिक धर्म की स्थापना हेतु आयोजित सर्वाधिक समन्वित आध्यात्मिक अनुष्ठान
प्राच्य वैदिक परंपराओं के अभ्युदय का आधार
ब्रह्मवर्चस् जागरण का सत्प्रयास
पर्यावरणीय शुद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने में सहायक
वैदिक यज्ञपरंपरा के वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पुनरुत्थान को सुदृढ़ करने तथा मानव चेतना को उच्च स्तर पर ले जाने में सहायक
विश्वव्यापकता, शास्त्रीयता, अनुशासन एवं सत्संकल्प को वैश्विक स्तर पर अद्वितीय बनाने में मील का पत्थर
महायज्ञ को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने हेतु ‘सनातन वैदिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि उत्थान समिति’ को भी विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया
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