कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों से आए बीजेपी ये 9 दिग्गज, जो पार्टी में आते ही सत्ता के शिखर पर पहुंचे

BJP Oath Ceremony

Newschuski Digital Desk: भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में अब सिर्फ कैडर ही नहीं, बल्कि जनाधार को सबसे ऊपर रखा जाने लगा है। पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नए सफर की शुरुआत ने एक बार फिर इस चर्चा को गर्म कर दिया है कि क्या बीजेपी अब दूसरी पार्टियों से आने वाले कद्दावर नेताओं के लिए सॉफ्ट लैंडिंग की सबसे बड़ी जगह बन गई है? सुवेंदु अधिकारी से लेकर हिमंता बिस्वा सरमा तक, ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने अपना करियर किसी और दल में शुरू किया, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक बीजेपी के साथ पहुँचे।

सुवेंदु अधिकारी (कांग्रेस से टीएमसी और फिर बीजेपी)

कभी ममता बनर्जी के दाहिने हाथ कहे जाने वाले सुवेंदु ने 2020 में टीएमसी का साथ छोड़ा। 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में खुद ममता बनर्जी को मात देकर अपनी ताकत साबित की।

हिमंता बिस्वा सरमा (असम)

असम के सबसे प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं में से एक रहे हिमंता ने 2015 में बीजेपी का दामन थामा। पूर्वोत्तर में बीजेपी के विस्तार का श्रेय उन्हें ही जाता है, जिसके इनाम के तौर पर उन्हें 2021 में मुख्यमंत्री बनाया गया।

subhendu adhikari sworn in as first bjp cm west bengal

सम्राट चौधरी (बिहार)

आरजेडी और जेडीयू के रास्ते होते हुए बीजेपी में आए सम्राट चौधरी पहले प्रदेश अध्यक्ष, फिर उपमुख्यमंत्री और अब मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी तक पहुँचे।

पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश)

कांग्रेस से पीपीए और फिर बीजेपी का रुख करने वाले पेमा खांडू आज अरुणाचल में बीजेपी का सबसे विश्वसनीय चेहरा हैं।

सरबानंद सोनोवाल (असम)

छात्र राजनीति (AASU) और फिर असम गण परिषद (AGP) से निकलकर सोनोवाल 2011 में बीजेपी में आए और 2016 में राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बने।

एन बीरेन सिंह (मणिपुर)

कांग्रेस छोड़कर 2017 में बीजेपी में शामिल हुए बीरेन सिंह ने मणिपुर में पहली बार बीजेपी की सरकार बनाई और राज्य में संगठन को मजबूती दी।

बसवराज बोम्मई (कर्नाटक)

जेडीएस से करियर शुरू करने वाले बोम्मई ने 2008 में बीजेपी जॉइन की और 2021 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कमान संभाली।

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अर्जुन मुंडा (झारखंड)

जेएमएम और शिबू सोरेन के करीबी रहे अर्जुन मुंडा 2000 में बीजेपी में आए और नए बने राज्य झारखंड के मुख्यमंत्री बने।

गेगोंग अपांग (अरुणाचल प्रदेश)

22 सालों तक सत्ता में रहने वाले अपांग ने कांग्रेस के लंबे सफर के बाद 2003 में बीजेपी का साथ पकड़ा और एनडीए सरकार का नेतृत्व किया।

सचिन पायलट: एक अधूरी उड़ान

2020 में राजस्थान के सचिन पायलट की बगावत ने भी ऐसी ही अटकलें पैदा की थीं, लेकिन संख्या बल की कमी के कारण वे कांग्रेस में ही रुक गए। इसे बीजेपी की रणनीति का एक ऐसा हिस्सा माना जाता है जहाँ वह मजबूत जनाधार वाले नेताओं को अपने साथ जोड़कर राज्यों में अपनी जड़ें गहरी करती है।

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