कंगना रनौत और बाबा रामदेव के बीच वार-पलटवार, एक्ट्रेस ने कहा- चरित्र का पाठ न पढ़ाएं
Newschuski Digital Desk: योग गुरु स्वामी रामदेव और मंडी से भाजपा सांसद व बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई है। कंगना रनौत द्वारा प्रदर्शनकारी युवाओं (Gen Z) को लेकर दिए गए ‘गटर जेनरेशन’ वाले विवादित बयान पर स्वामी रामदेव ने जब तंज कसा, तो एक्ट्रेस ने भी सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया है। कंगना ने रामदेव के बयान का करारा जवाब देते हुए कहा कि वह उन्हें चरित्र का पाठ न पढ़ाएं और अफवाहों के आधार पर बयानबाजी करने से बचें।
सुप्रीम कोर्ट से मुझे झूठे दावों पर फटकार नहीं मिली
स्वामी रामदेव के बयान के बाद कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर स्टोरी पोस्ट कर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम को लेकर दिन में सपने देखना बंद कीजिए। अफवाहों और गॉसिप्स के आधार पर सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से भ्रामक दावों या धोखाधड़ी वाले मेडिकल विज्ञापनों के लिए फटकार तो नहीं पड़ी है, जो कि पक्के तथ्यों पर आधारित है। कंगना ने आगे लिखा कि उनका चरित्र स्वामी रामदेव से कहीं बेहतर है, इसलिए उन्हें कैरेक्टर का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है।
रामदेव ने क्या कहा था
दरअसल, टीवी9 को दिए एक इंटरव्यू में स्वामी रामदेव ने कंगना के जेन जी (Gen Z) वाले बयान पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था, किसी भी जेन जी को गटर बोलना बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। यह गलत बात है और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। जब उनसे कंगना के पुराने जीवन पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि उनकी जवानी और कारनामे कैसे रहे हैं, वह इस पर बात नहीं करना चाहते। रामदेव ने आगे जोर देकर कहा कि आज के युवा भारत का वर्तमान और भविष्य हैं, और पूरे युवा वर्ग को नकारना किसी भी तरह से सही नहीं है।
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क्या था गटर जेनरेशन से जुड़ा पूरा विवाद
जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों और कुछ युवा महिलाओं को गटर जेनरेशन कहकर संबोधित किया था। इस बयान के बाद विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कंगना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जमकर आलोचना की। चौतरफा घिरने के बाद कंगना ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका बयान पूरे देश के युवाओं या ‘Gen Z’ के लिए नहीं था, बल्कि यह सिर्फ उन चंद लोगों के लिए था जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक मर्यादा और अभद्र भाषा की सीमा लांघी थी।
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