गोरखपुर जेल से बंदी की फरारी पर उठे सवाल, निलंबित जेलर जताई साजिश की आशंका, जांच शुरू
Gorakhpur News: गोरखपुर जिला जेल से गत 31 जुलाई को बंदी विपिन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई फरारी का मामला अब नए विवाद में घिर गया है। घटना के बाद गाज गिरने से निलंबित हुए तत्कालीन जेलर अरुण कुमार ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को एक पत्र भेजकर फरारी की सरकारी कहानी और जांच रिपोर्ट पर ही कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका दावा है कि जिस पीपल के पेड़ की डाल से होकर बंदी के भागने का दावा रिपोर्ट में किया गया है, वहां से बिना रस्सी, चादर या कंबल के सुरक्षित निकलना पूरी तरह असंभव है।
देरी से बजा फायर अलार्म, टाइमिंग पर उठे सवाल
निलंबित जेलर अरुण कुमार द्वारा भेजे गए पत्र में सबसे बड़ा सवाल घटना के समय और आपातकालीन अलार्म को लेकर उठाया गया है। जेल अधीक्षक की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में बंदी विपिन (पुत्र हरिशंकर) के भागने का समय सुबह 11 बजे और स्थान नवनिर्माणाधीन बैरकों के पास मौजूद पीपल का पेड़ बताया गया है। अरुण कुमार का कहना है कि यदि बंदी 11 बजे गायब हुआ था, तो जेल में आपातकालीन ‘फायर अलार्म’ ढाई घंटे की देरी से (दोपहर बाद) क्यों बजाया गया? नियमानुसार बंदी के गायब होने की सूचना मिलते ही तत्काल अलार्म बजाकर पूरी जेल को अलर्ट मोड पर लाया जाना चाहिए था।
बिना उपकरण पीपल के पेड़ से भागना नामुमकिन
पत्र में जेलर ने मांग की है कि जांच टीम द्वारा बताए गए फरारी स्थल का नए सिरे से निष्पक्ष मौका-मुआयना कराया जाए। उनका तर्क है कि मुख्य प्राचीर के पास स्थित पीपल के पेड़ की ऊंचाई और बनावट ऐसी है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी सहायक सामग्री के वहां से छलांग नहीं लगा सकता। उन्होंने आशंका जताई है कि या तो फरारी का रास्ता कोई और था या फिर कहानी को मनगढ़ंत तरीके से गढ़ा गया है।
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निर्माणाधीन स्थल के मजदूरों और संदिग्ध जेल कर्मियों की जांच की मांग
मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निलंबित जेलर ने जेल परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों में लगे सभी बाहरी व्यक्तियों की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सड़क, बैरक और गौशाला निर्माण में लगे बाहरी मजदूरों और ठेकेदारों के नाम, पते और पहचान पत्र (आईडी) जुटाकर उनका सत्यापन कराया जाए। इसके अलावा, उन्होंने जेल के कुछ संदिग्ध प्रवृत्ति वाले कर्मचारियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
17 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ
घटना के 17 दिन बीत जाने के बावजूद फरार बंदी विपिन का कोई सुराग पुलिस या जेल प्रशासन के हाथ नहीं लग सका है। इस बीच निलंबित जेलर के खुलासे भरे पत्र के सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने पत्र में उठाए गए सभी बिंदुओं और आरोपों का संज्ञान लेते हुए नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
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