समाजवादी अपने ही बनाए तुष्टिकरण के चक्रव्यूह में फंसे

UP Elections 2027
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं। सभी राजनीतिक दल अपना-अपना नैरेटिव सेट करने में जुट गए हैं। अभी तक आए सर्वेक्षणों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता 67 प्रतिशत है तथा बीजेपी गठबंधन भी बढ़त बनाए हुए है। इससे प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव दबाव में दिखाई दे रहे हैं।

संभवतः इसी कारण अब वह प्रदेश में पीडीए के अंतर्गत यादव के अतिरिक्त अन्य जातियों का समीकरण साधने के साथ ही अपने को सनातनी दिखाने की जतन भी कर हैं। आजकल वह अपने आपको उदार हिंदू बता रहे हैं, कथा सुन रहे हैं किन्तु प्रभु राम की जन्मभूमि को प्रणाम करने से परहेज करते हुए मुख्यमंत्री योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने चुनौती दे रहे हैं।

वर्ष 2012 में सपा मुखिया स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि वह और डिंपल यादव घर में भी पूजा-पाठ नहीं करते हैं। यही नहीं ये समाजवादी डा. राममनोहर लोहिया की रामायण मेले की परंपरा का अनुपालन भी नहीं करते हैं, किन्तु आजकल स्वयं को सनातनी बता रहे हैं। जिस पार्टी के विधायक, सांसद व समर्थक रामचरित मानस का अपमान करते हुए उसकी प्रतियाँ सड़क पर जला देते हैं आज वही सपा मुखिया अपने आपको सनातनी बताकर आगामी विधानसभा चुनाव जीतना चाहते हैं। विडंबना ये है कि एक ओर स्वयं को हिन्दू हितैषी का प्रयास चल रहा है वहीं एआईएआईएम प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी के बढ़ते प्रभुत्व को दृष्टिगत रखते हुए मुस्लिम वोटबैंक बचाने के लिए आजम खां से मिलने के लिए जेल जाया जा रहा है।

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सपा प्रमुख एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए संभल व जौहर विश्वविद्यालय को मुद्दा बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जो सनातन है वही समाजवाद है कहकर हिन्दुओं को रिझाना चाहते हैं। विजयादशमी पर सपा प्रमुख ने कहा, समाजवाद ही रामराज्य है। समाजवादी पार्टी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि रामराज्य की बात की गई है। इसके पूर्व सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने कभी भी अपनी मुस्लिम परस्त छवि को अपने आप से अलग नहीं किया। 1990 के बाद मुस्लिम समाज सपा और बसपा के प्रति भरोसा दिखाता रहा। वर्तमान सपा मुखिया ने भी कभी मुस्लिम तुष्टिकरण वाली अपनी छवि नहीं बदली, फिर अचानक क्या हो गया कि सपा मुखिया अखिलेश यादव स्वयं को उदार हिंदू बता रहे हैं? पीडीए के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए वे आगामी 5 नवंबर 2026 से दलित संतों को साधने का अभियान भी आरंभ करने जा रहे हैं।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश के मुसलमानों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को 90 प्रतिशत वोट दिया था। साथ ही गैर जाटव दलितों ने भी पहली बार इस गठबंधन पर भरोसा जताया था। सपा नेता को समझ में आ गया कि अगर उन्हें सत्ता प्राप्त करनी है तो हिंदू मतदाता को भी साथ लाना होगा। बस यही मज़बूरी उन्हें सनातनी बना रही है।
सपा मुखिया के “सच्चा सनातनी बनाम नकली सनातनी” वाले बयान के आते ही भाजपा की ओर से आक्रामक उत्तर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर में विजयदशमी समारोह के अवसर पर बिना किसी का नाम लिए ऐसे लोगों को कालनेमि बताया और कहा कि राम युग में भी राक्षस लोग भेष बदल-बदलकर राम-राम कहते थे और बजरंगबली उनकी पहचान करते थे।

भाजपा का कहना है कि सपा ने हमेशा ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की है और आज भी कर रही है। भाजपा ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा के शासनकाल में किस प्रकार से बहुसंख्यक हिंदुओं के त्योहारों को प्रतिबंधित करने का काम किया गया। समाजवादी पार्टी किस प्रकार से अराजक तत्वों के साथ है। सपा मुखिया कहते हैं कि जिन लोगों को अच्छा भोजन करना है वह हमारे साथ आएं किन्तु प्रदेश का हिंदू अच्छी तरह से जानता है कि उनका अच्छा भोजन क्या होता है। अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर की प्रशंसा में सपा मुखिया ने कभी एक शब्द तक नहीं बोला, क्योंकि वह अगर एक बार भी मंदिर के पक्ष में बोल देंगे तो उनके मुस्लिम वोट बैंक के बिखर जाने का खतरा पैदा हो जाएगा।

सपा नेता रामजी लाल सुमन नवरात्र के अवसर पर मुस्लिम नेता के घर गए और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के बाद वहां जाकर अच्छे भोजन अर्थात चिकन बिरयानी का आनंद प्राप्त किया। यह वही रामजी लाल सुमन हैं, जिन्होंने सदन में राणा सांगा को गद्दार कहकर अपमानित किया था। वाराणसी में जब कुछ मुस्लिम युवाओं ने गंगा नदी के ऊपर नाव में बैठकर इफ्तार पार्टी के बाद झूठी हड्डियाँ नदी में फेंकी थीं, तो सपा ने उनका बचाव किया था। सपा के ऐसे हजारों कृत्य हैं, जिनसे यह साबित हो जाता है कि सपा एक नकली सनानती व हिंदू का चोला ओढ़े हुए आज की कालनेमि है।

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सपा संविधान बचाओ व लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर आगामी 26 नवंबर संविधान दिवस के अवसर पर अपना चुनावी घोषणा पत्र लाने जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि वह संविधान दिवस पर आयोजित होने वाले समारोह का भी बहिष्कार करती है। वर्ष-2027 में सपा सत्ता पाने के लिए व्यग्र है और यही कारण है कि उसने अपने युवाओं का गणवेश नीला कर लिया है और पीडीए के साथ मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए पीडीए के आगे मुस्लिम समाज का प्रतीक चिन्ह बहुत बड़े आकार में बनाया है, फिर अपने आपको सनातनी व हिंदू हितैषी भी कह रही है। वास्तव में सपा अपने ही बनाए तुष्टिकरण के चक्रव्यूह में फंस चुकी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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