सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा बड़ा खुलासा, वियना कन्वेंशन के उल्लंघन पर उठे सवाल

Nazrul Islam

Newschuski Digital Desk: सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों (एक पुरुष और एक महिला) को दी गई मौत की सजा के बाद से बांग्लादेश के भीतर भारी नाराजगी और कूटनीतिक असंतोष का माहौल है। शुरुआत में मीडिया रिपोर्ट्स में इन्हें पति-पत्नी बताते हुए मक्का शहर की एक मस्जिद के अंदर अनैतिक गतिविधियों के आरोप में सजा दिए जाने का दावा किया गया था, हालांकि दोनों के परिवारों ने इस तरह के किसी भी रिश्ते से साफ इनकार कर दिया था। अब एक गोपनीय फाइल के खुलासे ने इस मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।

गोपनीय फाइल से सच आया सामने

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी के जेद्दा में स्थित बांग्लादेश के महावाणिज्य दूतावास के एक गोपनीय मेमो से यह बात सामने आई है कि 14 अक्टूबर को फांसी पाने वाले दोनों बांग्लादेशी नागरिकों नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सुएटी अख्तर (परिवार के अनुसार स्वीटी अख्तर) को अगस्त 2023 से ही अलग-अलग मामलों में हिरासत में रखा गया था।

नजरुल इस्लाम: इन्हें 1 अगस्त 2023 को सऊदी अरब के सख्त साइबर क्राइम कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था और इन्हें जेद्दा करेक्शनल फैसिलिटी में रखा गया था।

सुएटी अख्तर: इन्हें इसके अगले दिन, यानी व्यभिचार (एडल्टरी) के आरोपों के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और जेद्दा महिला जेल में रखा गया था। दोनों ही व्यक्ति सऊदी अरब में अल मजल नामक कंपनी में सफाईकर्मी के रूप में काम करते थे।

वियना कन्वेंशन के उल्लंघन के आरोप

इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया और सजा ने अपनी अस्पष्टता के कारण कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि सऊदी सरकार ने इस मामले की आधिकारिक और समय पर जानकारी बांग्लादेश को नहीं दी थी।

बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि बांग्लादेश और सऊदी अरब दोनों ने जिनेवा कन्वेंशन (वियना कन्वेंशन) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पूरी घटना में सूचना साझा करने में गंभीर कमी रही है, और हमने सऊदी अरब से स्पष्टीकरण मांगा है ताकि यह पता चल सके कि यह चूक क्यों हुई।

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नियमों के मुताबिक, 1963 के कांसुलर संबंधों पर वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 36 के तहत किसी भी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किए जाने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने पर अपने देश के दूतावास से संपर्क करने और सहायता पाने का अधिकार होता है। लेकिन जेद्दा में बांग्लादेशी महावाणिज्य दूतावास ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें इस बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

कैदियों की सूची में भी नहीं था सजा का जिक्र

द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्य दूतावास को जो कैदियों की सूची मिली थी, उसमें कुल 97 कैदियों के अपराधों का संक्षिप्त विवरण तो था, लेकिन इन दोनों बांग्लादेशियों को मौत की सजा दिए जाने के संबंध में उस सूची में कोई भी जिक्र नहीं किया गया था। इसके विपरीत, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने सजा के बाद बयान जारी कर यह दावा किया था कि दोनों को मक्का की एक मस्जिद के भीतर एक अनैतिक कृत्य का दोषी पाया गया था, जिसके बाद उन्हें मौत के घाट उतारा गया।

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