मोदी कैबिनेट में स्मृति ईरानी की वापसी तय, फिर सुर्खियों में फायरब्रांड नेता

Modi Cabinet Reshuffle

Modi Cabinet Reshuffle: आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी टीम (केंद्रीय मंत्रिमंडल) में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। इस संभावित फेरबदल में जहां कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिकाएं बदली जा सकती हैं, वहीं बीजेपी के कुछ दिग्गज चेहरों की कैबिनेट में दोबारा एंट्री की उम्मीद है। वापसी करने वाले नेताओं की इस फेहरिस्त में सबसे चर्चित और बड़ा नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का सामने आ रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कयासों का बाजार गर्म है।

अमेठी की हार के बाद संगठन में रहीं एक्टिव

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से चुनावी शिकस्त मिलने के बाद से स्मृति ईरानी मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति और मीडिया की सुर्खियों से थोड़ा दूर नजर आई थीं। हालांकि, इस दौरान वह लगातार भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक कार्यों और पार्टी की अंदरूनी गतिविधियों में सक्रिय रहीं।

हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उन्हें अपना स्टार प्रचारक बनाकर मैदान में उतारा, जहां उनकी धुआंधार रैलियों और आक्रामक प्रचार के दम पर पार्टी ने बंपर जीत दर्ज की। इन दिनों स्मृति ईरानी के अमेठी दौरे पर होने के कारण उनकी कैबिनेट में वापसी की अटकलें और ज्यादा मजबूत हो गई हैं, हालांकि अभी तक बीजेपी या खुद स्मृति ईरानी की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

संसद में बीजेपी को खल रही है स्मृति ईरानी की कमी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सत्रों के दौरान जब महिला आरक्षण जैसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर संसद में तीखी बहस हो रही थी, तब बीजेपी को स्मृति ईरानी की कमी शिद्दत से महसूस हुई। भारतीय जनता पार्टी को इस समय संसद के भीतर एक ऐसे प्रखर और आक्रामक चेहरे की जरूरत है, जो विपक्ष के हमलों का पुरजोर जवाब देते हुए सरकार का पक्ष मजबूती से रख सके।

पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री के तौर पर स्मृति ईरानी की बेबाक वक्तृत्व शैली और हाजिरजवाबी इस भूमिका के लिए सबसे सटीक बैठती है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान अपने इस पुराने और भरोसेमंद चेहरे को कैबिनेट में कोई बड़ा और महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंप सकता है।

अमेठी में राहुल गांधी को हराकर रचा था इतिहास

छोटे पर्दे की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री और टीवी की चहेती बहू रहीं स्मृति ईरानी ने साल 2003 में बीजेपी का दामन थामकर अपने राजनीतिक सफर का आगाज किया था। 2004 में उन्हें महाराष्ट्र युवा विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया और इसी साल उन्होंने दिल्ली की चांदनी चौक सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि वह जीत नहीं सकीं। इसके बाद अगस्त 2011 में उन्होंने गुजरात से राज्यसभा सांसद के रूप में पहली बार संसद में कदम रखा।

साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश की हाई-प्रोफाइल सीट अमेठी से राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन करीब 1 लाख वोटों के अंतर से हार गईं। इसके बावजूद पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताते हुए कैबिनेट में मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्री की अहम जिम्मेदारी दी। इसके बाद 2016 में उन्हें कपड़ा मंत्रालय सौंपा गया। साल 2019 के चुनाव में स्मृति ईरानी ने अमेठी में राहुल गांधी को पटखनी देकर इतिहास रच दिया और वहां की सांसद बनीं। हालांकि, 2024 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के के.एल. शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

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स्मृति का नहीं है कोई आपराधिक रिकॉर्ड

साल 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, स्मृति ईरानी और उनके पति जुबिन ईरानी के पास 17 करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त संपत्ति है। इस संपत्ति में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित चार आलीशान घर शामिल हैं, जिनमें दो मुंबई (पति के साथ सह-स्वामित्व), एक पुणे और एक गोवा में स्थित है।

इसके अलावा, उनके पास लगभग 28 लाख रुपये की एमजी हेक्टर (MG Hector) कार और 37 लाख रुपये से अधिक मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात हैं। हलफनामे के मुताबिक उनके पास 1,08,740 रुपये की नकदी है। स्मृति ईरानी की साफ-सुथरी छवि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके खिलाफ कानूनन एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

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