भारत में सोना रखने के नियम, कितना सोना रखना कानूनन सही

gold possession rules in india

Gold possession rules in India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अगले एक साल तक सोने की खरीदारी से परहेज करने की अपील की थी। उनका तर्क था कि देश को गैर-जरूरी आयात घटाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। इस अपील के बाद पूरे देश में सोना रखने को लेकर कानूनी नियमों और सीमाओं पर एक बार फिर जोरदार चर्चा छिड़ गई है।

भारत में सोना है बचत और प्रतिष्ठा का प्रतीक

भारतीय समाज में सोना केवल आभूषण मात्र नहीं है, बल्कि यह बचत, निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी एक अहम जरिया है। आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ती महंगाई और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के समय ज्यादातर लोग सोने को ही सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। यही वजह है कि गांव की कच्ची झोपड़ी से लेकर शहरों की चमचमाती हाई-राइज बिल्डिंग तक, हर भारतीय परिवार में सोने की मांग बनी रहती है।

जानिए सीबीडीटी के 1994 के नियम

हालांकि देश में किसी भी व्यक्ति के पास कितना सोना हो सकता है, इसकी कोई स्पष्ट कानूनी सीमा नहीं है। लेकिन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 11 मई 1994 को एक परिपत्र जारी कर आयकर अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश तय किए थे। इन नियमों का मकसद आयकर छापों के दौरान अनावश्यक विवादों से बचना था। इनके तहत अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे एक निश्चित सीमा तक सोने के आभूषण जब्त न करें।

महिलाएं और पुरुष- अलग-अलग है सीमा

सीबीडीटी के इन नियमों के मुताबिक, किसी विवाहित महिला के पास 500 ग्राम तक सोने के आभूषण होने पर उन्हें जब्त नहीं किया जा सकता। अविवाहित महिलाओं के लिए यह सीमा 250 ग्राम रखी गई है। वहीं पुरुषों के मामले में, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित, सिर्फ 100 ग्राम तक सोने के आभूषण रखने की छूट है। इन सीमाओं के अंदर पाए जाने वाले सोने को आयकर अधिकारी सामान्य परिस्थितियों में जब्त नहीं कर सकते।

वैध स्रोत बताने पर नहीं होगी जब्ती

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पास मौजूद सोने का विवरण संपत्ति कर विवरणी में दे चुका है, या वह सोने के वैध स्रोत (जैसे विरासत, उपहार, बैंक से खरीद) का संतोषजनक प्रमाण पेश कर देता है, तो उसका सोना जब्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, परिवार की परंपरा, सामाजिक स्थिति और रीति-रिवाजों को देखते हुए अधिकारियों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे अधिक मात्रा में सोना होने पर भी अपने विवेक से फैसला ले सकते हैं।

वैध स्रोत न बता पाने पर लग सकता है 78% तक का टैक्स

लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपने पास रखे सोने का वैध स्रोत नहीं बता पाता, या उसका जवाब अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगता, तो फिर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे मामलों में उस पर भारी कर लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस तरह के सोने पर अधिभार और उपकर मिलाकर लगभग 78 फीसदी तक कर वसूला जा सकता है। इसके अलावा 10 फीसदी तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आयात शुल्क बढ़ने से खुदरा कीमतों पर पड़ेगा सीधा असर

वहीं, सोने पर बढ़ी हुई आयात शुल्क दरों ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से सोने की खुदरा कीमतों में तेजी आएगी। इसका सबसे अधिक दबाव मध्यम वर्ग और सीमित बजट वाले ग्राहकों पर पड़ेगा। आशंका जताई जा रही है कि निकट भविष्य में सोने की बिक्री में गिरावट आ सकती है।

जानकारों के अनुसार, भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा सोना आयात के जरिए ही पूरा करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश का सोना आयात बढ़कर 72 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 58 अरब डॉलर था। ऐसे में आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का सीधा असर कीमतों पर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

सेन्को गोल्ड के प्रबंध निदेशक सुवंकर सेन का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा और कई ग्राहक फिलहाल खरीदारी टाल सकते हैं। उनके अनुसार, निकट अवधि में बिक्री में 10 से 15 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। वहीं, मालाबार समूह के अध्यक्ष एमपी अहमद का मानना है कि पहली बार सोना खरीदने वालों को नई कीमतों के हिसाब से ढलने में समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने सोने के बदले नया आभूषण लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ेगी।

त्योहार और शादी से जुड़ा है सोना

ज्वेलरी कारोबार से जुड़े उद्योगपति डॉ. जॉय अलुक्कास का कहना है कि भारत में शादी और त्योहारों के साथ सोने का गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्ता है। इसलिए लंबी अवधि में मांग पूरी तरह से कमजोर नहीं होगी। उनके अनुसार, अब ग्राहक सोने को केवल आभूषण के रूप में नहीं बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखने लगे हैं।

पुराने सोने के बदले नए गहने देने पर जोर

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कई कंपनियां पुराने सोने के बदले नए आभूषण देने वाली योजनाओं पर जोर दे रही हैं। कल्याण ज्वेलर्स ने ‘गोल्ड फोर इंडिया’ नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत ग्राहकों को पुराने, टूटे या बेकार पड़े आभूषण बदलकर नया सोना खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही, कम शुद्धता वाले 18 कैरेट के आभूषणों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कम मात्रा में शुद्ध सोने का इस्तेमाल हो सके।

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सोने की ईंटों और सिक्कों का आयात घटाना जरूरी

रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने भी अपने सदस्यों से कम कैरेट वाले आभूषणों की बिक्री बढ़ाने और सोने की ईंटों (बुलियन) तथा सिक्कों में निवेश को हतोत्साहित करने की अपील की है। परिषद का मानना है कि सोने की ईंटों और सिक्कों का आयात कुल सोने के आयात का लगभग 20 से 30 फीसदी हिस्सा है, जिसे कम करना अत्यंत आवश्यक है।

क्या बदलेगा आने वाले समय में

प्रधानमंत्री की अपील, आयात शुल्क में वृद्धि और सरकार की बढ़ती निगरानी ने सोने के बाजार को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक तरफ सरकार आयात कम करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ भारतीय समाज में सोने की सांस्कृतिक अहमियत के कारण इसकी मांग पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोने की खरीदारी का तरीका जरूर बदलेगा। लोग पुराने आभूषण बदलने, हल्के और कम कैरेट के गहने खरीदने और समझदारी से निवेश करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि ये बदलाव भारतीय ज्वेलरी बाजार को किस दिशा में ले जाते हैं।

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