राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, रामशंकर और गोपाल राय समेत कई लोग घेरे में
Ram Mandir Ayodhya Donation Theft: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की धनराशि में कथित चोरी का मामला इन दिनों पूरे देश में सुर्खियों में है। इस संवेदनशील मामले के खुलासे के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश की रफ्तार काफी तेज कर दी है। एसआईटी की सुई अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ऑडिट विभाग से लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा तक पहुंच चुकी है। जांच एजेंसी इस पूरे सिस्टम से जुड़े लोगों को तलब कर रही है। अब तक 11 से अधिक संदिग्धों से सघन पूछताछ की जा चुकी है, जिनमें से कई लोगों के पास आय से अधिक और अप्रत्याशित संपत्ति होने की जानकारियां सामने आ रही हैं।
चर्चाओं के केंद्र में रामशंकर यादव और गोपाल राय की भूमिका
इस पूरे कथित घोटाले में फिलहाल दो नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आए हैं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गोपाल राय। रामशंकर यादव की पृष्ठभूमि एक साधारण ड्राइवर की रही है, जो 1980 और 90 के दशक में अयोध्या में ऑटो चलाता था। साल 1995-96 के दौरान वह कारसेवकपुरम आया और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों व कार्यशाला के मालवाहक वाहनों को चलाने लगा। राम मंदिर का शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद उसे मंदिर की मरम्मत और सबसे महत्वपूर्ण काम यानी ‘चंदा गिनने’ की टीम में शामिल कर लिया गया। आरोप हैं कि इस दौरान उसकी आर्थिक स्थिति और संपत्ति में बेहद तेजी से इजाफा हुआ।
वहीं, दूसरा बड़ा नाम गोपाल राय का है, जो चंदे की रकम की गिनती के मुख्य प्रभारी थे। गोपाल राय विहिप के केंद्रीय मंत्री होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भी पूर्व पदाधिकारी रहे हैं। विहिप की ओर से ट्रस्ट और बैंक के बीच होने वाले वित्तीय लेन-देन की निगरानी का जिम्मा उन्हीं के पास था। चंदा गिनने वाली पूरी टीम उन्हीं के अधीन काम करती थी, जिससे वे सीधे तौर पर सवालों के घेरे में हैं।

चार दर्जन से अधिक दानपात्र और रसीद प्रणाली भी रडार पर
राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश मार्ग से लेकर भगवान के गर्भगृह के समक्ष और निकास द्वार तक 4 दर्जन (48 से अधिक) दानपात्र रखे गए हैं। इसके अलावा, जो लोग गुप्त दान नहीं करते, वे ट्रस्ट के कार्यालय में नकद, सोने-चांदी के रूप में बड़ी धनराशि जमा कर रसीद प्राप्त करते हैं। दानपात्रों से निकाली गई इस विशाल नगद धनराशि को एक बड़े हॉल में ले जाकर गिना जाता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते यह चढ़ावा प्रतिदिन कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
अब तक मिल चुका है 5 हजार करोड़ का चंदा
राम मंदिर ट्रस्ट को चंदे और दान के रूप में अब तक कुल 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। पूर्व में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि मंदिर निर्माण पर करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और शेष सुरक्षित राशि बैंकों में जमा है। इस भारी-भरकम रकम की गिनती के लिए एसबीआई की नामित एजेंसी और ट्रस्ट के कुछ खास वफादार कर्मचारियों सहित करीब दो दर्जन लोग तैनात रहते हैं, जिनका दैनिक लेखा-जोखा बैंक में दर्ज होता है।
मिश्रा परिवार के कनेक्शन की कड़ाई से जांच
एसआईटी की रडार पर अयोध्या के ही रवि मिश्रा, उनके पुत्र अनुकल्प मिश्रा और दामाद लवकुश मिश्रा का एक पूरा कुनबा आ गया है। रवि और अनुकल्प का मूल निवास मिल्कीपुर के ईटगांव में है। जब इस संबंध में उनके पैतृक गांव जाकर रवि के पिता से बात की गई, तो उन्होंने दो टूक कहा कि उनके बेटे और पोते से उनका कोई वास्ता नहीं है और वे इस मामले पर कुछ नहीं जानते।
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वहीं, रुदौली के फगौली ठकुरान के रहने वाले दामाद लवकुश मिश्रा के परिजनों का दावा है कि लवकुश बेकसूर है, हालांकि वह अयोध्या में रहकर मंदिर के काम से कैसे जुड़ा, इसकी जानकारी परिवार को भी नहीं है। गांव के अन्य लोग भी इस विषय पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
विवाद पर संबंधित विभागों में चुप्पी, चंपत राय ने जारी किया खंडन
इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर इस समय अयोध्या में पूरी तरह रहस्य और चुप्पी का माहौल है। बैंक, पुलिस प्रशासन या ट्रस्ट का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कैमरे पर ऑन-रिकॉर्ड या ऑफ-रिकॉर्ड कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर इन खबरों का खंडन किया है। उनका कहना है कि फिलहाल चोरी जैसी कोई बात स्थापित नहीं हुई है, बल्कि रूटीन प्रक्रिया के तहत गहन आंतरिक ऑडिट किया जा रहा है। जांच और मुकम्मल ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति साफ हो सकेगी।
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