अपने ही गढ़ में हारीं ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी ने 15 हजार से अधिक वोटों से दी शिकस्त
bhowanipore election result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा स्तंभ मानी जाने वाली मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को अपनी ही पारंपरिक सीट भवानीपुर से करारी हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक बेहद कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से पराजित कर बंगाल की सियासत में एक नया इतिहास रच दिया है।
आखिरी राउंड्स में पलटा पासा, सुवेंदु ने दी ममता को मात
कोलकाता की चर्चित भवानीपुर सीट पर सुबह से ही कांटे की टक्कर देखने को मिली। शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहा और दोनों बार-बार एक-दूसरे से आगे-पीछे होते रहे। हालांकि, मतगणना के आखिरी दौर में सुवेंदु अधिकारी ने निर्णायक बढ़त बना ली, जिसे पार पाना ममता बनर्जी के लिए मुमकिन नहीं रहा। भवानीपुर, जिसे ममता बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता था, वहां सुवेंदु की इस जीत ने टीएमसी के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है।
भवानीपुर में दिखी सीधी और भीषण जंग
भवानीपुर के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ मुकाबला पूरी तरह से ‘दो ध्रुवीय’ नजर आया। मुख्य प्रतिद्वंद्वियों को मिले वोट इस प्रकार हैं।
सुवेंदु अधिकारी (BJP): 73,917 वोट पाकर विजयी रहे।
ममता बनर्जी (TMC): महज 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
तीसरे नंबर के उम्मीदवार: केवल 3,556 वोट ही हासिल कर सके।
चौथे नंबर के उम्मीदवार: इन्हें सिर्फ 1,257 मतों से संतोष करना पड़ा।
इन आंकड़ों से साफ है कि भवानीपुर की जनता ने सुवेंदु और ममता के बीच सीधा चुनाव किया, जिसमें सुवेंदु अधिकारी जनता का भरोसा जीतने में सफल रहे।
इसे भी पढ़ें: 2027 के महासंग्राम में क्या अखिलेश का PDA रोक पाएगा योगी का विजय रथ
टीएमसी की शिकस्त के पीछे क्या रहे बड़े कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल में टीएमसी की हार और बीजेपी की जीत के पीछे कई गहरे कारण रहे हैं। राज्य में लंबे समय से व्याप्त सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency), बिगड़ती कानून-व्यवस्था और स्थानीय भ्रष्टाचार के मुद्दों ने हवा का रुख बदल दिया। वहीं, बीजेपी की आक्रामक चुनावी रणनीति, जमीनी स्तर पर संगठन की अभूतपूर्व मजबूती और शीर्ष नेतृत्व के सघन प्रचार अभियान ने टीएमसी के ‘किले’ में सेंध लगाने का काम किया। ममता बनर्जी की व्यक्तिगत हार यह संकेत देती है कि अब बंगाल की जनता ने बदलाव की राह चुन ली है।
इसे भी पढ़ें: बंगाल में कमल की सुनामी के साथ 21 राज्यों में पहुंचा एनडीए का कुनबा
