लक्ष्मणपुर की जीवन रेखा,
क्या कहती आज विचार करें।
समझें जल प्रवाह को उसके,
गौरव ज़न मन में संचार करें।।

जागे समाज और करे ध्यान,
है गोमती गौरव का अभियान।।

तटवर्ती आश्रम मठ मन्दिर,
हों जागृत बनें संस्कारशाला।
शासन और प्रशासन जागे,
गोमा में मिले न कोई नाला।।

सब जगे समाज होवे निदान।
है गोमती गौरव का अभियान।।

तट बँध सुसज्जित हो पूरा,
हरियाली हो पुष्प वाटिका हो।
योग व्यायाम हो ध्यान केंद्र,
परिवारों की बाल नाटिका हो।।

हो जीवन स्वस्थ्य परंपरावान।
है गोमती गौरव का अभियान।।

घाट सुसज्जित स्वच्छ सभी,
हों संस्कार विधि पूर्ण यहाँ।
दर्शन स्नान करें सब पूजन,
हो नहीं प्रदूषण कोई बहाँ।।

आस्था से संयुत होवे विधान।
है गोमती गौरव का अभियान।।

अविरल निर्मल जल प्रवाह,
तलछट बालू तक स्वच्छ रहे।
जलकुम्भी मुक्त प्रवाह पूर्ण,
स्नान योग्य जल यहाँ बहे।।

आदिगंगा गोमा का बढ़े मान।
है गोमती गौरव का अभियान।।

-बृजेंद्र

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