मनुस्मृति के बहाने कांग्रेस का भारतीय परिवार संस्कृति पर हमला

Rahul Gandhi
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने मुद्दों को धार देने के लिए छात्रों की गूंज कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस कार्यक्रम का आयोजन लगभग असफल रहा इसलिए आयोजकों ने रणनीति में बदलाव करते हुए विगत 22 अगस्त 2026 महाराष्ट्र के पुणे में एआईएसए एमएस ग्राउंड पर यह कार्यक्रम केवल छात्राओं के साथ किया। राहुल गांधी ने पुणे की छात्राओं से पीली टी -शर्ट पहनकर संवाद किया। मंच के बैकड्राप में हिन्दू महिलाओं को पिंजरे में दिखाया गया था।

छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने, “स्मैश द पैट्रिआर्ची” और ‘पिंजरा तोड़ो’ का नारा दिया। उन्होंने छात्राओं से पितृसत्तात्मक सोच और रूढ़ियों के बंधनों को तोड़कर मुखर होने तथा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि आधी आबादी किसी की गुलाम नहीं है। उन्होंने छात्राओं से अपने सपनों के लिए लड़ने और समाज के बनाए अदृश्य पिंजरे यानि नियंत्रण और पाबंदियों को तोड़ने के लिए कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पितृसत्तात्मक मानसिकता महिलाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करती है और उनकी पहचान को सिर्फ पारिवारिक रिश्तों तक सीमित कर देती है। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में मनुस्मृति तथा हिन्दू परिवार व्यवस्था पर जमकर हमला बोला और कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं की गलत व्याख्या की गई है।

जब राहुल गाँधी मनुस्मृति पर हमला बोल रहे थे और हिन्दू संस्कृति में पितृसत्ता का अंत करने की अपील कर रहे थे तब उनके सामने हिजाब में कैद छात्राएं खड़ी थीं, लेकिन राहुल का ध्यान उनकी तरफ नहीं गया। राहुल गांधी के बयानों से प्रतीत हो रहा तथा कि उनका मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज की परिवार संस्था को लांछित करना है और वो वामपंथी हिंदू विरोधी अभियान पिंजड़ा तोड़ के ब्रांड एंबेसडर हैं। पिंजड़ा तोड़ वाले दल विश्वविद्यालयों में ढपली बजाकर आंदोलन करते रहते हैं, जो राष्ट्रवाद की आंधी में यह दम तोड़ रहे हैं। किंतु अब राहुल गांधी भारतीय पारिवारिक संस्कृति को तहस-नहस करने के लिए इनके ब्रांड एम्बेसडर बन गए हैं।

रहुल गाँधी एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं। वह हिन्दू बेटियों को परिवार से परे ले जाकर उन्हें जोखिम में डालना चाहते हैं, उन्हें बरगलाकर एक तीर से कई निशाने साध रहे हैं, जिसमें लव जिहाद को बढ़ावा देने से लेकर धर्मांतरण कराने तक के देश विरोधी लक्ष्य हैं। कांग्रेस मनुस्मति की बात करके हिंदू सनातन संस्कृति व परिवार पर हमला बोल रहे हैं लेकिन इस्लाम तथा इसाई मजहबों में स्त्रियों के पिंजड़ों की बात नहीं करते। मुस्लिम तुष्टिकरण में अंधी हो चुकी कांग्रेस पार्टी हिंदू बेटियों से पिंजरा तोड़ने आह्वान करती है और मुस्लिम छात्राओं के लिए के लिए हिजाब की वकालत उनका धार्मिक अधिकार कह के करती है।

Rahul Gandhi

मनुस्मृति के श्लोक का सहारा लेकर राहुल गांधी ने अपना हिंदू विरोधी नैरेटिव सेट करने के लिए यह तो बता दिया कि इसमें स्पष्ट कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद अपने पुत्रों के अधीन रहना चाहिए। किन्तु जो श्लोक नारी के वृहद् अधिकार की बात करते हैं, उनको भूल गए, वास्तविकता यह है कि मनुस्मृति में ही महिलाओं को विवाह से लेकर जीवन यापन तक हर प्रकार की पूर्ण स्वतंत्रता भी दी गई है।

नारी सशक्तीकरण से कांग्रेस का इतना ही सम्बन्ध है कि शाहबानो प्रकरण में इनके नेता और तब के प्रधानमंत्री ने लोकसभा में भारी बहुमत के बाद भी, कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक कर शाहबानो को उसके अधिकार से वंचित कर दिया था। ये नारी सशक्तीकरण के ऊपर मुस्लिम तुष्टिकरण चुनने वाली पार्टी है। जब मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्त करने का प्रयास होता है, केंद्र सरकार विधेयक लाती है तब यही दोहरे चरित्र वाली कांग्रेस विरोध में खड़ी हो जाती है। राहुल गांधी वादा करते हैं सत्ता में आने पर वह तीन तलाक कानून को रद्द कर देंगे। राहुल गांधी व कांग्रेस के दोहरे मापदंडों से आज मुस्लिम समाज की तीन तलाक पीड़ित महिलाएं भयभीत हैं, क्योंकि उन्हें याद है कि राहुल गांधी के पिता के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार ने ही शाहबानो प्रकरण को संसद में कानून बनाकर पलट दिया था?

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कांग्रेस के इतिहास में कई घटनाएं हैं जो इस पार्टी की महिला विरोधी मानसिकता को उजागर करती हैं। दिल्ली का रोंगटे खड़े कर देने वाले नैना साहनी केस में कांग्रेसी अपने नेता को ही बचाने में लगे रहते थे। शारदा राठौर से लेकर सिमोरन रोजवेल जान तक कांग्रेस की अपनी महिला नेत्रियाँ अपमानजनक व्यवहार का शिकार बनी हैं। बंगाल के संदेशखाली प्रकरण, और आरजी कर रेप केस पर दोहरी मानसिकता वाले राहुल गांधी का मुंह बंद हो गया था राहुल गांधी को लगता है कि लोग यह भूल चुके हैं कि किस तरह उनकी सगी चाची मेनका गाँधी को आधी रात में छह माह के दुधमुहें वरुण के साथ उनकी माँ और दादी ने घर से निकाल कर सड़क पर फेंक दिया था।

राहुल गांधी व कांग्रेस की महिला स्वतंत्रता पर दोहरे मापदंड उस समय भी उजागर हुए थे जब उनकी पार्टी के लोगों ने भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उपहास किया था। कांग्रेस के नेता महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपनी पार्टी की महिलाओं के लिए ही टंच माल जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। भारत के हिन्दू समाज को राहुल गाँधी के खतरनाक मंसूबों को समझना चाहिए और अपनी परिवार संस्था की रक्षा करनी चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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