श्रीराम मंदिर चंदा चोरी विवाद के बीच बंद कमरे में अमित शाह से मिले सीएम योगी, यूपी चुनाव से पहले बड़े बदलाव के संकेत

CM Yogi Amit Shah Meeting

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CM Yogi Amit Shah Meeting: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर देश के सबसे बड़े सूबे में सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। सत्ता की चाह में विपक्ष लगातार सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामे के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को अचानक देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे। सीएम योगी ने दिल्ली पहुंचते ही देश के गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह से कर्तव्य भवन में मुलाकात की।

दोनों कद्दावर नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई इस अचानक मुलाकात ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक के राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। सियासी हलकों में यह भी पुरजोर अटकलें हैं कि सीएम योगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात कर सकते हैं, हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आठ गिरफ्तारियों के बाद डैमेज कंट्रोल की बड़ी तैयारी

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे की कथित चोरी के मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस विवाद से न सिर्फ सरकार बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट की छवि पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिससे करोड़ों राम भक्तों की आस्था और विश्वास को ठेस पहुंची है। इस मामले में अब तक दान-गिनती प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

विपक्ष में बैठी समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार योगी सरकार पर हमलावर है। चूंकि राम मंदिर हमेशा से भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी और वैचारिक कार्ड रहा है, जिसके बलबूते पार्टी ने यूपी की सत्ता पर अपना एकछत्र राज कायम रखा है, इसलिए इस बैठक में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि 2027 के विधानसभा चुनाव पर इसका कोई विपरीत असर न पड़े।

उल्लेखनीय है कि सीएम योगी के नेतृत्व में भाजपा ने यूपी में लगातार दो बार सत्ता का स्वाद चखा है (पहला कार्यकाल 19 मार्च 2017 से 25 मार्च 2022 और दूसरा कार्यकाल 25 मार्च 2022 से अब तक जारी है)। साल 2017 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 403 सीटों में से रिकॉर्ड 325 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 274 सीटों का था। ऐसे में इस किले को बचाए रखने के लिए डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज हो गई है।

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का फाइनल गेम प्लान

इस अचानक हुई रणनीतिक मुलाकात का सबसे मुख्य एजेंडा साल 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए भाजपा अब यूपी में अपनी पकड़ को फिर से अभेद्य बनाना चाहती है। माना जा रहा है कि सीएम योगी ने अमित शाह के साथ आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत ब्लूप्रिंट साझा किया है।

इसमें उत्तर प्रदेश के जटिल जातिगत समीकरणों को साधने, सरकार के विकास कार्यों को बूथ स्तर तक पहुंचाने और विपक्ष (सपा-कांग्रेस-बीएसपी के संभावित गठबंधन) के चक्रव्यूह को तोड़ने की रणनीति शामिल है। चुनावी मास्टर स्ट्रैटजिस्ट अमित शाह को बीजेपी का थिंक टैंक माना जाता है जो माइक्रो-मैनेजमेंट में माहिर हैं। इस बैठक में कैंडिडेट सिलेक्शन, नए बूथों के गठन और बूथ मैपिंग की रणनीति पर गंभीर चर्चा हुई है।

यूपी के चेहरों पर सस्पेंस और गुटबाजी की चुनौतियां

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को पद संभाले 6 महीने से अधिक का समय हो चुका है और अब वह अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (टीम नबीन) को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। कयास हैं कि इस नई टीम में युवाओं को तरजीह दी जाएगी। राजनीतिक पंडितों की नजर इस बात पर है कि यूपी से संगठन में किसका कद बढ़ने वाला है। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि योगी कैबिनेट के किसी कद्दावर चेहरे को संगठन की मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

हाल ही में लखनऊ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत के लिए सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी पहुंचे थे, लेकिन वीडियो में नबीन सीएम योगी को नजरअंदाज करते दिखे थे। इस वीडियो के बाद यूपी बीजेपी में आंतरिक गुटबाजी और नए-पुराने नेताओं के बीच तालमेल की कमी की खबरें तैर रही थीं, जिस पर भी इस बैठक में चर्चा होना लाजिमी माना जा रहा है।

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यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस

सीएम योगी और अमित शाह की इस महामुलाकात में उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव भी एक बेहद अहम एजेंडा रहे। सूबे में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण और प्रशासनिक औपचारिकताओं के चलते ये चुनाव लगातार टलते आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, बीजेपी फिलहाल पंचायत चुनावों का जोखिम नहीं उठाना चाहती और इन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर विचार कर रही है, हालांकि अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

मोदी कैबिनेट 3.0 का फेरबदल, काउंटडाउन शुरू

इस बैठक के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार 3.0 के कैबिनेट रीशफल (मंत्रिमंडल फेरबदल) की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। सियासी हलकों में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, जिसमें करीब पांच मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। इस फेरबदल में भी युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस कैबिनेट विस्तार में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कोटे से कई बड़े और चौंकाने वाले नामों को शामिल किए जाने की संभावना है, जिस पर सीएम योगी और गृह मंत्री के बीच नाम तय किए जा चुके हैं।

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