Basti News: सरकारी फाइलों में 14 साल से मुर्दा है रिटायर्ड कर्मचारी, कफन ओढ़कर डीएम से मांगा न्याय
Basti News: स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी ड्यूटी करता रहा और राजस्व विभाग ने 14 साल पहले मुर्दा घोषित कर उसकी 0.770 हेक्टेयर जमीन दूसरे के नाम कर दी। यह भ्रष्टाचार का मामला बस्ती जिले का है, जिसने न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक ईमानदारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन इसके किरदार और जख्म बिल्कुल असली हैं।
जीवित व्यक्ति 14 साल से सरकारी फाइलों में मुर्दा
बस्ती का जीवित व्यक्ति पिछले 14 वर्षों से सरकारी फाइलों में मुर्दा है, जबकि बैंक से अपनी पेंशन निकालकर खा रहा है और शासन के सामने जीवित खड़ा होकर अपने वजूद की भीख मांग रहा है। गुरुवार को सरकारी फाइलों में मुर्दा बुजुर्ग, शरीर पर कफन और गले में माला डालकर न्याय के लिए डीएम ऑफिस पहुंचा। बुजुर्ग को देखकर सभी चौंक गए, राहगीर भी सोच में पड़ गए कि आखिर कैसे एक जिंदा लाश मुर्दा बनकर सरकारी सिस्टम को मुंह चिढ़ा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में स्वीपर थे पीड़ित इशहाक अली
दरअसल यह पूरा मामला लालगंज थाना अंतर्गत ग्राम बानपुर गांव का है। पीड़ित इशहाक अली पुत्र फुल्लूर संतकबीर नगर, नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर तैनात था। रिकॉर्ड के मुताबिक, इशहाक अली ने 31 दिसंबर, 2019 को अपनी सेवा पूरी की और विभाग ने उन्हें ससम्मान विदाई दी, लेकिन राजस्व विभाग के जादूगरों ने इससे सात साल पहले ही इशहाक को सरकारी फाइलों में मार दिया था।
बस्ती के इशहाक अली के साथ सरकारी तंत्र ने खेल कर दिया। दस्तावेजों में उनको मार दिया तो वो कफ़न ओढ़कर गेंदे की माला डालकर डीएम ऑफिस आ गए और बोले- साहब, मैं मर चुका हूं, मुझे जिंदा कर दीजिए। #Basti #DeadMan #Revenue #Records #Documents #corpse #Shroud pic.twitter.com/f2YbnIZ6vf
— News Chuski (@Newschuski) April 17, 2026
2012 में फर्जी मौत दर्ज कर दूसरे के नाम चढ़ाई जमीन
तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए 2 दिसंबर, 2012 को कागजों में इशहाक अली की मौत दर्ज कर दी। मौत दर्ज होते ही उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 को गांव के ही एक महिला शाहिदुन्निशा के नाम चढ़ा दिया।
राजस्व ने मारा, स्वास्थ्य ने 7 साल तक दी तनख्वाह
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि साल 2012 से 2019 के बीच, जब राजस्व विभाग के अनुसार इशहाक अली स्वर्गवासी हो चुका था, उसी दौरान स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने वेतन दे रहा था। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन के दो अंगों के बीच कोई तालमेल नहीं है? अगर कर्मचारी मर गया था, तो स्वास्थ्य विभाग 7 साल तक वेतन किसे देता रहा? अगर कर्मचारी जीवित था तो बिना मृत्यु प्रमाण पत्र की पुष्टि किए राजस्व निरीक्षक ने वरासत कैसे दूसरे के नाम कर दी?
इशहाक अली आज भी जीवित हैं और सरकार से नियमानुसार पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। उनके पास पेंशन पेमेंट ऑर्डर है, बैंक का स्टेटमेंट है और जीवित होने का प्रमाण पत्र भी है। बावजूद इसके, तहसील के गलियारों में उन्हें ‘मृत’ बताकर उनकी जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा बरकरार है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले कई सालों से अधिकारियों की चौखट घिस रहा है, लेकिन भ्रष्ट तंत्र अपनी गलती सुधारने के बजाय मामले को दबाने में जुटा है।
इसे भी पढ़ें: सम्राट को सुशासन का हस्तांतरण
पीड़ित बुजुर्ग ने कहा, साहब, मैं हर दिन खुद को जिंदा साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाता हूं। सरकार मुझे पेंशन दे रही है ताकि मैं पेट भर सकूं, लेकिन मेरे अपनों और मेरे गांव में मुझे कागजी तौर पर मार दिया गया है। उन्होंने कहा, मेरी जमीन मेरी पहचान है और मैं अपनी पहचान वापस लेने के लिए कई साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा हूं।
आजमगढ़ के लाल बिहारी प्रकरण की याद
यह मामला आजमगढ़ के मशहूर लाल बिहारी मृतक की याद दिलाता है, जिन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बस्ती का यह मामला उससे भी गंभीर है क्योंकि यहां पीड़ित एक सरकारी सेवक है। इस प्रकरण को लेकर एसडीएम शत्रुघ्न पाठक से जब बात की गई, तो उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति उनके पास आया है, जो खुद को जीवित बता रहा है। उनका प्रकरण बेहद गंभीर है। इस मामले में जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी और पीड़ित बुजुर्ग को न्याय दिलाया जाएगा।
इसे भी पढ़ें: टॉक्सिक 4 जून को बड़े पर्दे पर मचाएगी तहलका
