परिवारवाद की माया, आकाश आनंद को फिर बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, ढाई साल में 9वां यू-टर्न
UP Politics Latest News: क्षेत्रीय दलों का वजूद परिवारवाद, जातिवाद पर टिका हुआ है। शायद यही वजह है कि इन दलों में पदाधिकारी की नियुक्ति में परिवार के लोगों को तरजीह दी जाती है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच जारी सियासी सस्पेंस पर एक बार फिर विराम लग गया है। कभी कड़क प्रशासक और सख्त फैसलों के लिए जानी जाने वाली मायावती अपने परिवार व पार्टी प्रमुख के रूप में एक बार फिर पिघल गई हैं। बसपा चीफ ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जा चुके आकाश आनंद को न सिर्फ माफ कर दिया है, बल्कि उन्हें एक बार फिर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक जैसे बेहद अहम और शक्तिशाली पद की जिम्मेदारी सौंप दी है।
मई 2024 से शुरू हुआ यू-टर्न का सिलसिला
मायावती और आकाश आनंद के रिश्तों में आए इस उतार-चढ़ाव की शुरुआत 7 मई 2024 को हुई थी, जब पहली बार मायावती ने आकाश को अपरिपक्व बताते हुए उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया था। हालांकि, डेढ़ महीने बाद ही मायावती का रुख नरम हुआ और उन्होंने आकाश को जिम्मेदारी वापस लौटा दी। इसके बाद करीब 9 महीने तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन मार्च 2025 में ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव का हवाला देते हुए आकाश पर दोबारा गाज गिराई गई और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति…
— Mayawati (@Mayawati) October 5, 2026
भावुक माफीनामा और पदोन्नति का चला दौर
पार्टी से निकाले जाने के बाद आकाश आनंद की सार्वजनिक माफी पर बुआ मायावती ने 13 अप्रैल 2025 को उनकी वापसी कराई। इसके बाद मई में उन्हें मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक और अगस्त 2025 में फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। लगभग एक साल तक आकाश आनंद ने पार्टी के लिए आक्रामक प्रचार किया और सपा व भाजपा पर जमकर हमला बोला। हालांकि, 3 सितंबर को उन पर फिर गाज गिरी और उन्हें पदमुक्त कर सामान्य कार्यकर्ता बना दिया गया, जबकि उनके भाई ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाया गया।
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ससुर के संन्यास और भावुक अपील के बाद शांत हुआ बहनजी का गुस्सा
10 सितंबर तक तल्खी इतनी बढ़ गई कि मायावती ने आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को बसपा से बाहर कर दिया। राजनीतिक संकट गहराते देख अशोक सिद्धार्थ ने दामाद के राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए राजनीति से संन्यास तक की घोषणा कर दी। इसके बाद आकाश आनंद द्वारा की गई भावुक अपील ने आखिरकार मायावती का दिल पिघला दिया। अब देखना दिलचस्प होगा कि बसपा के नीले झंडे तले आकाश आनंद को इस बार कितना लंबा और खुला आसमान मिलता है।
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