Hindi poem: लोकतंत्र की माया

हमारे लोकतंत्र ने ये गुल खिलाया है,
एक पागल को भी नेता यहां बनाया है।
जो लूटता रहा इस देश को सत्तर वर्षों,
उसी ने लूटने का जाल फिर बिछाया है।
उसके घर में ठगों की राजनीति होती थी,
वो आंख मारने की राजनीति लाया है।
जो वंश हिंदुओं का सबसे बड़ा दुश्मन था,
वही अब गोत्र का फरमान लेके आया है।
वो घूमने लगा है ‘श्याम’ अब हिंदू बनकर,
तिलक माथे पर भेड़िए ने भी सजाया है।
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