Nation Building Poem
Brijendra Pal Singh
बृजेंद्र पाल सिंह

भारत गुरु गौरव को पाए, शांति समृद्धि आए हर देश।
हम सब भी हों संकल्पित, हो राष्ट्र भाव आलोकित परिवेश।।

व्यक्ति से समाज बनता है, जब व्यक्ति दीप बन जलता।
संकल्प सिद्धि साधना से, वर्तमान कृति से कल फलता।।

राष्ट्रीय गौरव कर्म अनेक, छोटे बड़े सभी का सु-फल है।
कदम हमारा बड़े सुपथ में, हमसे ही जीवन का कल है।।

अब कोई क्षेत्र रहे न खाली, प्रकाश किरण पहुंचाएं हम।
ज्ञान विज्ञान प्रज्ञान सभी में, कौशल दीप जलाएंगे हम।।

दुनियां देख रही है हमको, आशा भरी दृष्टि से हर पल।
पहले स्वयं समर्थ बनें हम, आलोक भरें विश्व के नभ थल।।

जो भी क्षेत्र चुनो सामर्थ्य से, वही दीप स्तंभ बन जाए।
वसुधा को परिवार बनाना, शुभ पल शीघ्र सामने आए।।

हम भी एक बूंद बन उसमें, अहं से वयं मार्ग अपनाएं।
जीवन का हर पल सार्थक हो, कृपा प्रभू की ऐसी पाएं।

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