ईरान की अंडरवियर प्रोटेस्ट गर्ल को जबरन दिए जा रहे एंटी-साइकोटिक इंजेक्शन, जानें क्या है मामला

Ahoo Daryaei

Newschuski Digital Desk: नवंबर 2024 में ईरान की इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी की छात्रा आहू दरयाई का एक छोटा सा विरोध पूरी दुनिया में मानवाधिकारों और महिला स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया। यूनिवर्सिटी की सीढ़ियां चढ़ते वक्त फोन में व्यस्त होने के कारण उनके सिर से हिजाब खिसक गया था। इसी बात पर गश्त-ए-इरशाद (मोरल पुलिस) के कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ खींचातानी शुरू कर दी। बर्बरता के दौरान जब उनके कपड़े फटने लगे और उन्हें सजा वाले कमरे की तरफ घसीटा जाने लगा, तो दो बच्चों की मां दरयाई ने हताशा और गुस्से में अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ अंडरवियर पहनकर यूनिवर्सिटी प्रांगण में घूमकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अस्पताल के बेड से बांधकर दी गई बेहोशी की दवाएं

प्रोटेस्ट के बाद दरयाई जब यूनिवर्सिटी परिसर की एक दीवार पर बैठी थीं, तभी पुलिस की वैन वहां पहुंची और उन्हें जबरन लाद लिया गया। रास्ते में एक महिला अफसर ने घुटनों के बीच उनका सिर दबाकर सांस अवरुद्ध करने का प्रयास किया, जिससे उनके अनाथ होते बच्चों की फिक्र में वे बुरी तरह सहम गईं। पुलिस स्टेशन ले जाकर उन्हें बेहोश करने के इंजेक्शन दिए गए। जब उनकी आंख खुली, तो उनके हाथ-पैर मानसिक अस्पताल के बेड से बंधे हुए थे। जब भी वे अपने परिजनों से मिलने या बाहर जाने की मांग करतीं, उन्हें फिर से नशीली सुई लगाकर बेहोश कर दिया जाता था।

Ahoo Daryaei

रिहाई के बदले पागल करार देने की शर्त

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वीडियो वायरल होने और मानवाधिकार संगठनों के दबाव के बाद ईरानी हुकूमत ने इस विरोध को दबाने के लिए नई साजिश रची। सरकार ने उनके इस विरोध को मानसिक बीमारी का नतीजा साबित करने का प्रयास किया। पुलिस ने उनके परिवार और पूर्व पति पर दबाव बनाकर यह बयान दिलवाया कि दरयाई मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। 18 दिनों के बाद उन्हें इस सख्त चेतावनी के साथ रिहा किया गया कि उन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, फोन टैप होंगे और उन्हें जबरन साइकियाट्रिक दवाएं लेनी होंगी।

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सिजोफ्रेनिया के जबरन इंजेक्शन और जेल का खौफ

32 वर्षीय दरयाई अब टेक्सटाइल्स की पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें हर महीने फ्लूपेंटिक्सोल (सिजोफ्रेनिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला हैवी साल्ट) का इंजेक्शन लेने के लिए मजबूर किया जाता है ताकि वे सुस्त और बेसुध बनी रहें। डॉक्टरों ने साफ चेताया है कि यदि वे इंजेक्शन लेने से मना करेंगी, तो उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर मेंटल वार्ड में बांध दिया जाएगा। उनके करीबियों के अनुसार, फांसी, कोड़े या आजीवन कैद से बचने के लिए परिवार इस प्रताड़ना को झेलने पर मजबूर है।

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