देश में 30 से 40 फीसदी वकील फर्जी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Fake Lawyers

नई दिल्ली: देश भर की अदालतों में पैरवी कर रहे फर्जी वकीलों के खिलाफ बड़े स्तर पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वकील राजा चौधरी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में मांग की गई है कि फर्जी वकीलों के गठजोड़ और नेटवर्क की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाए।

मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे अत्यंत गंभीर मुद्दा माना। याचिका में तर्क दिया गया कि वकालत एक प्रतिष्ठित और गरिमामयी पेशा है, और यदि इसमें फर्जी लोग शामिल होते हैं तो इससे समूची न्यायिक व्यवस्था और संस्था की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचता है।

याचिका और सुनवाई से जुड़े प्रमुख बिंदु

याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के उस बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बार में 30 से 40 प्रतिशत (यानी हर 3 में से 1) वकील फर्जी हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि फर्जी लोग वकालत के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने भी सहमति जताते हुए कहा कि इलाहाबाद में 105 फर्जी वकीलों का मामला सामने आया है। याचिकाकर्ता के अनुसार केवल इलाहाबाद बार में ही 1,000 से अधिक फर्जी वकील सक्रिय हो सकते हैं।

हाल ही में कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि वकालत के पेशे में माफिया किस्म के लोग आ गए हैं। इसके बाद यूपी में बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 फर्जी वकीलों पर FIR दर्ज की गई है और जल्द ही लगभग 100 मामलों में कार्रवाई की तैयारी है।

इसे भी पढ़ें: स्कॉर्पियो ब्रांड के तहत नई छोटी SUV Vision S लाने की तैयारी

भारत में वकीलों की संख्या और वेरिफिकेशन प्रक्रिया

कुल रजिस्टर्ड वकील: कानून मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, देश में फिलहाल 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट हैं और हर साल करीब 80 हजार नए वकील एनरोल होते हैं।

नियम और सत्यापन: वकालत के लिए एलएलबी (LLB) की डिग्री के साथ बार काउंसिल का ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) पास करना अनिवार्य है।

5 साल में वेरिफिकेशन: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए वेरीफिकेशन रूल्स-2015 के तहत हर 5 साल में वकीलों की प्रैक्टिस और कार्यस्थल का सत्यापन किया जाता है। गलत जानकारी देने पर बार काउंसिल को वकीलों का लाइसेंस रद्द करने का अधिकार है।

इसे भी पढ़ें: कंदुका पहाड़ी पर बसा मुरुदेश्वर महादेव मंदिर, जानिए रामायण काल से जुड़ा इतिहास

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NEWS CHUSKI के Facebook पेज को LikeTwitterInstagram पर Follow करना न भूलें...