यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में फर्जी शादियों के जरिए सैनिकों की सरकारी मुआवजे पर डाका

Death Payout Scam

Russian Army Scam: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी भयावह जंग अब सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके साये में एक खौफनाक और शर्मनाक खेल भी पनपने लगा है। जहाँ एक तरफ मिसाइलों और ड्रोन्स के हमलों में रोजाना अनगिनत जवान अपनी जान गँवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस के भीतर शहादत पर मिलने वाली सरकारी राशि को हड़पने के लिए एक संगठित रैकेट सक्रिय हो चुका है। इसे रूस में डेथ पेआउट स्कैम यानी मौत का मुआवजा घोटाला कहा जा रहा है।

इस घिनौने खेल में मोर्चे पर जाने वाले, घायल या अनाथ सैनिकों से गुपचुप व फर्जी शादियाँ कराई जा रही हैं, ताकि उनकी मौत के बाद मिलने वाला करोड़ों का मुआवजा हड़पा जा सके। इस पूरे षड्यंत्र में सिर्फ शातिर महिलाएँ ही नहीं, बल्कि सैन्य अस्पतालों के कर्मचारियों से लेकर सेना के बड़े अधिकारियों तक की मिलीभगत के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

मुआवजे के लालच में काली विधवाओं का जाल

रूसी कानून के तहत युद्ध में मारे गए सैनिक के परिवार को लगभग 50 लाख रूबल (करीब 62 लाख भारतीय रुपये) की एकमुश्त सहायता मिलती है। इसमें बीमा और अन्य भत्ते जोड़ दिए जाएँ तो यह राशि 1 करोड़ रुपये के पार पहुँच जाती है। इसी भारी-भरकम रकम पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठी महिलाओं और आपराधिक गिरोहों को अब रूसी मीडिया में ‘ब्लैक विडो’ (काली विधवा) कहा जा रहा है। धोखाधड़ी का स्तर यह है कि एक सैन्य अस्पताल की नर्स ने कथित तौर पर इलाज करा रहे 5 अलग-अलग घायल जवानों से शादियाँ कर लीं, ताकि उनकी मृत्यु के बाद पूरी राशि वह अकेले हड़प सके।

आपबीती: मारिया की दास्तान

सेंट पीटर्सबर्ग की मारिया इस घोटाले का प्रत्यक्ष शिकार बनी हैं। उनके 59 वर्षीय पिता यूरी जब युद्ध में शहीद हुए, तो मारिया को पता चला कि मोर्चे पर भेजने से महज दो दिन पहले उनके पिता ने खुद से 22 साल छोटी एक अनजान महिला से गुपचुप शादी रचा ली थी। नतीजा यह हुआ कि जीवनभर की कमाई और शहादत का सारा मुआवजा उस अनजान औरत के खाते में चला गया और परिवार पूरी तरह बेसहारा रह गया। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने सैनिकों की सहूलियत के लिए शादी के नियमों में जो ढील दी थी, उसका अपराधियों ने बेहद निर्दयता से फायदा उठाया।

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फ्लैट का झांसा और सैन्य तंत्र की संलिप्तता

यह कड़वी सच्चाई तब और खुलकर सामने आई जब साइबेरिया के एक पॉडकास्ट में रियल एस्टेट एजेंट ने यह तक सलाह दे डाली कि सस्ता घर चाहिए तो युद्ध पर जा रहे सैनिक से शादी कर लो। हालाँकि, बाद में उस पर कानूनी कार्रवाई हुई। वहीं प्रिमोर्स्की इलाके में जाँच एजेंसियों ने सेना के वारंट ऑफिसर, सार्जेंट और अकाउंटेंट के एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो अकेले या अनाथ जवानों को ढूँढकर उनकी जबरन फर्जी शादी कराते थे और फिर उन्हें जानबूझकर सबसे खतरनाक मोर्चे पर भेज देते थे, ताकि मौत के बाद मुआवजा आपस में बाँटा जा सके।

युद्ध की आड़ में पनप रहा यह घिनौना व्यापार यह साबित करता है कि चंद पैसों के लालच में इंसानियत किस कदर दम तोड़ रही है। संसद से लेकर आम जनता तक में इस पर भारी आक्रोश है। देश के लिए जान देने वाले जवानों की शहादत का यह सौदा रूस ही नहीं, पूरी इंसानियत के नाम पर एक गहरा कलंक बन चुका है।

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