BMW करेगी 8,000 नौकरियों की कटौती, ऑटो सेक्टर में मंदी की आहट
BMW Job Cuts: वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में जारी आर्थिक दबाव, घटती बिक्री और बढ़ती लागत के बीच जर्मनी की दिग्गज लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW ने अपने कारोबार के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने वर्ष 2027 के अंत तक लगभग 8,000 नौकरियां कम करने की योजना बनाई है। हालांकि, कंपनी बड़े पैमाने पर जबरन छंटनी करने के बजाय कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement Scheme – VRS) का विकल्प देगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, BMW जर्मनी में काम करने वाले अपने कुल 85 हजार स्थायी कर्मचारियों में से करीब 40 हजार ऑफिस-बेस्ड कर्मचारियों के सामने वीआरएस का प्रस्ताव रख सकती है। यह प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। राहत की बात यह है कि कंपनी ने फिलहाल फैक्ट्रियों और उत्पादन इकाइयों में तैनात कर्मचारियों को इस योजना से बाहर रखा है। परिचालन खर्च नियंत्रित करने को लेकर कंपनी और कर्मचारी यूनियनों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
ईवी ट्रांजिशन, अमेरिकी टैरिफ और चीनी कंपनियों से तगड़ी चुनौती बनी वजह
ग्लोबल ऑटो सेक्टर इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर शिफ्ट होने में भारी तकनीकी निवेश, EV सेगमेंट से कम मुनाफा, अमेरिका की कड़ी शुल्क नीतियां और चीन की कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा ने यूरोपीय लग्जरी ब्रांड्स पर दबाव बढ़ा दिया है। कम लागत और एडवांस्ड तकनीक के दम पर चीनी ऑटो कंपनियां वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी पैठ बना रही हैं।
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चीन के प्रमुख बाजार में BMW की बिक्री में 30% की भारी गिरावट
चीन हमेशा से BMW के लिए बिक्री और कमाई का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में स्थितियां तेजी से बदली हैं। पिछले साल चीन में कंपनी की बिक्री 2017 के बाद के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून की तिमाही में चीन में BMW की कार डिलीवरी पिछले साल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत गिर गई है, जिससे कंपनी के राजस्व पर सीधा असर पड़ा है।
लागत में कटौती करने के मामले में केवल BMW अकेली नहीं है। जर्मनी की अन्य दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियां जैसे फॉक्सवैगन (Volkswagen) और मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) भी खर्च कम करने के लिए वीआरएस और नौकरियों में कटौती जैसे कड़े कदम उठा रही हैं। अनुसंधान, ईवी डेवलपमेंट और नई तकनीकों पर होने वाले भारी खर्च के बीच कंपनियां अपना परिचालन ढांचा सुव्यवस्थित करने में जुटी हैं।
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