टुंडे कबाबी पर वक्फ जमीन पर कब्जे का आरोप, मौलाना कल्बे जब्बाद ने CM योगी से की कार्रवाई की मांग
Lucknow Tunday Kababi Dispute: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चौक इलाके में स्थित अकबरी गेट के पास की प्रसिद्ध टुंडे कबाबी की दुकान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जब्बाद ने टुंडे कबाबी के मालिकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि दुकान के पास स्थित वक्फ संरक्षित मस्जिद की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा और सुरंगनुमा निर्माण कराया जा रहा है। मौलाना ने इस संवेदनशील मामले में सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
वक्फ की जमीन पर कराया जा रहा अतिक्रमण: कल्बे जब्बाद
मौलाना कल्बे जब्बाद ने आरोप लगाया कि जिस जगह पर टुंडे कबाबी की ऐतिहासिक दुकान स्थित है, उससे सटी वक्फ की 200 साल पुरानी मस्जिद है। आरोप के मुताबिक, वक्फ की इस संरक्षित संपत्ति पर अतिक्रमण के सहारे और अवैध रूप से सुरंगनुमा निर्माण कराकर जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस पूरे निर्माण कार्य की जांच की मांग उठाई है।
कान भरे गए हैं, सिर्फ साफ-सफाई कराई: अबू बकर
विवाद सामने आने के बाद जब मीडिया की टीम सन 1905 से संचालित इस ऐतिहासिक दुकान पर पहुंची, तो दुकान के मालिक अबू बकर कुरैशी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि यह उनकी चौथी पीढ़ी का व्यवसाय है जिसे उनके नाना ने 1905 में शुरू किया था।
अबू बकर ने स्पष्ट किया कि दुकान के भीतर किसी भी तरह का नया कंस्ट्रक्शन या सुरंग जैसा काम नहीं हुआ है। जिस जगह पर वे 1905 से काबिज हैं, दुकान आज भी ठीक उसी जगह पर है। केवल दुकान की मरम्मत, साज-सजावट और साफ-सफाई का कार्य कराया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने मौलाना के कान भर दिए हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।
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लीगल एग्रीमेंट के तहत हुई मरम्मत: मौलाना सैफ अब्बास
मामले में जमीनी पड़ताल से यह तथ्य सामने आया कि 200 साल पुरानी इस मस्जिद की देखरेख मुतवल्ली मौलाना सैफ अब्बास करते हैं। मौलाना सैफ अब्बास ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि ऊपर के पुराने मकानों से दुकान में लगातार पानी टपक रहा था, जिससे दुकानदार को भारी नुकसान हो रहा था।
उन्होंने बताया कि लगभग 4 महीने पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए लीगल तरीके से नया एग्रीमेंट कराया गया था। इसके बाद बाकायदा अनुमति लेकर केवल सीपेज (पानी के रिसाव) को रोकने का काम किया गया और टूटे हुए हिस्सों में सीमेंट लगाकर मरम्मत कराई गई। उन्होंने साफ किया कि मस्जिद की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही कोई सुरंग बनाई गई है। मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है।
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