दिल में बाबर, मुंह में राम के नारों वाले पोस्टर देख भड़के सपाई, कई जिलों में तनाव

Akhilesh Yadav Controversial Poster

Akhilesh Yadav Controversial Poster: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां और जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में बाराबंकी जिले में सपा संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक विवादित होर्डिंग लगाए जाने से सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। इस होर्डिंग में दोनों शीर्ष नेताओं को मुस्लिम टोपी पहने हुए दर्शाया गया है और साथ ही स्लोगन लिखा गया है- ‘दिल में बाबर, मुंह में राम।’ जैसे ही इस पोस्टर की भनक समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगी, उन्होंने मौके पर पहुंचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और तत्काल होर्डिंग को नीचे उतरवा दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही सपा के स्थानीय नेता ताज बाबा राईन अपने भारी संख्या में समर्थकों और आक्रोशित कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने विवादित होर्डिंग और पोस्टरों को उखाड़कर फाड़ दिया। इस दौरान इलाके में कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।

सपा नेताओं ने इस सुनियोजित कृत्य की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी है। पुलिस अब घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह होर्डिंग कब और किसने लगाई। फिलहाल इस मामले में कोई सुराग नहीं मिल सका है।

राम मंदिर और कारसेवकों के बयानों का जिक्र कर घेरा

बाराबंकी के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के पुराने इतिहास और राम मंदिर विवाद से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को हवा देने की कोशिश की गई है। पोस्टरों में अयोध्या के राम मंदिर प्रकरण, हनुमानगढ़ी के बाहर नमाज पढ़ने की वकालत और कारसेवकों पर गोली चलवाने जैसे विवादित मुद्दों का उल्लेख है। साथ ही राम मंदिर को लेकर मुलायम सिंह यादव, प्रो. रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव द्वारा समय-समय पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।

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कई जिलों में फैला पोस्टर वॉर

सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के विवादित पोस्टर सिर्फ बाराबंकी ही नहीं, बल्कि राजधानी लखनऊ, सीतापुर और अयोध्या समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य संवेदनशील जिलों में भी रातों-रात लगाए गए हैं। चूंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं, ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही इस शह और मात के खेल में अब यह पोस्टर वॉर एक नई रणनीति के रूप में सामने आया है, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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