गन कल्चर पर हाईकोर्ट सख्त, 10 लाख से अधिक लाइसेंस पर सवाल, योगी सरकार से जवाब तलब
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हथियार लाइसेंस के बढ़ते दुरुपयोग और गन कल्चर को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है, जिससे कानून का राज कमजोर होता है। अदालत ने योगी सरकार, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी से इस मामले में जवाब मांगा है। खास बात यह है कि प्रदेश में अब तक 10 लाख से अधिक हथियार लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से हजारों ऐसे लोगों को लाइसेंस मिले हैं, जिन पर दो या अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
कोर्ट ने पूछा- आपराधिक इतिहास वालों को लाइसेंस कैसे
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने राज्य सरकार के हलफनामे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर ‘गन कल्चर’ को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कई प्रभावशाली राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तियों के हथियार लाइसेंस पर भी सवाल उठाते हुए रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, सुनील यादव, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह और चुलबुल सिंह सहित 18 जाने-माने नामों की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की जानकारी मांगी है।
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कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिन पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनके हथियार लाइसेंस की समीक्षा क्यों नहीं की गई। अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर किसी अधिकारी ने तथ्य छिपाए तो उसे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
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