बंगाल में चुनावोत्तर हिंसा पर शुरू हुई कार्रवाई, CID ने 458 नई जांच शुरू कीं, 181 नई FIR दर्ज

West Bengal CID

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद राज्य प्रशासन ने 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा के मामलों की नए सिरे से समीक्षा करने का बड़ा फैसला लिया है। इसी क्रम में राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने चुनावोत्तर हिंसा से जुड़ी शिकायतों पर नई कार्रवाई तेज कर दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि अब तक इस मामले में 458 नई जांच शुरू की जा चुकी हैं और 181 नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।

फिर से खोले गए 59 बंद मामले

सीआईडी अधिकारी ने बताया कि राज्य की जांच एजेंसी ने 59 ऐसे मामलों को फिर से खोल दिया है, जिनमें पहले फाइनल रिपोर्ट जमा की जा चुकी थी। अधिकारी ने कहा, 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ी मिली शिकायतों को देखते हुए, प्रक्रिया के अनुसार जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एजेंसी उन मामलों पर भी दोबारा विचार कर रही है जो पहले बंद कर दिए गए थे। अब तक, 59 केस जिनमें फाइनल रिपोर्ट जमा हो चुकी थी, उन्हें आगे की जांच के लिए फिर से खोल दिया गया है और मामले में कार्रवाई जारी है।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के 300 मामलों की भी समीक्षा जारी

अधिकारी ने यह भी बताया कि इन मामलों के अलावा महिलाओं के खिलाफ हिंसा और पोक्सो (POCSO) एक्ट से जुड़े करीब 300 मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। ये वे मामले हैं जिनमें चुनावोत्तर हिंसा के दौरान महिलाओं और नाबालिगों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आई थीं।

बंद की गईं अंतिम रिपोर्टों की होगी सूक्ष्मता से जांच

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अजय रानडे ने यह आदेश जारी किए थे। पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे 2021 की हिंसा से संबंधित उन अंतिम रिपोर्टों की सूक्ष्मता से जांच करें जो उस समय दाखिल की गई थीं। यदि किसी मामले की जांच में खामियां पाई जाती हैं, तो उन्हें फिर से खोलकर नए सिरे से जांच की जाएगी।

जनरल डायरी प्रविष्टियों की भी होगी पड़ताल

इसके अतिरिक्त, पुलिस उन पुरानी जनरल डायरी (जीडी) प्रविष्टियों और आवेदनों की भी पड़ताल करेगी, जिनके आधार पर उस समय कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। यदि प्रारंभिक पूछताछ में कोई संज्ञेय अपराध पाया जाता है, तो तुरंत नया मामला दर्ज किया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन मामलों की सुनवाई (ट्रायल स्टेज) तक निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसे भी पढ़ें: वाणी की देवी कहलाती हैं मां वाग्देवी, जानें क्या है उनका स्वरूप

16 मई से अवैध हथियारों के खिलाफ शुरू हुआ राज्यव्यापी अभियान

राज्यव्यापी सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 16 मई से अवैध हथियारों की जब्ती का विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे हथियारों की जब्ती से संबंधित दैनिक रिपोर्ट एडीजी, सीआईडी को भेजें, जो इस डेटा को संकलित कर राज्य सरकार को सौंपेंगे।

सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष नजर, सीमावर्ती दलालों की होगी पहचान

इस अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को प्राथमिकता दी गई है। पुलिस अधीक्षकों को सक्रिय अपराधियों और सीमावर्ती दलालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब पुलिस थानों के स्तर पर हर महीने और उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के स्तर पर हर तिमाही में समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इसे भी पढ़ें: Ebola के नए रूप ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन, कांगो में मची तबाही

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NEWS CHUSKI के Facebook पेज को LikeTwitterInstagram पर Follow करना न भूलें...