महिला आरक्षण बिल: भावनाओं के जाल की गिरफ्त में विपक्ष

women reservation bill failed opposition 2029
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं को संसद व राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ वर्ष 2034 की बजाए 2029 से देने के लिए 131वां संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था। यह संशोधन विधेयक पारित होने के लिए इसके पक्ष में दो तिहाई बहुमत चाहिए था। कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस व डीएमके जैसे दलों ने इस संशोधन को समर्थन नहीं दिया, जिससे दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह 298 मतों के मुकाबले 230 मतों से गिर गया। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बाद विपक्षी दलों ने इसको प्रधानमंत्री की हार बताते हुए मेजें थपथपाकर जश्न मनाया।

लोकसभा में विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि इन सभी विधेयकों में उत्तर दक्षिण से कोई भेदभाव नहीं किया गया है और सरकार इसका कोई क्रेडिट भी लेना नहीं चाहती। साथ ही प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा था कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाले लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतेंगे। नंबर का खेल समय तय करेगा, किंतु नारी नीयत देखेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में मतदान से पूर्व कई बार विरोधी दलों से बिल का समर्थन प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से विपक्षी सांसदों से भावुक अपील भी की थी। प्रधानमंत्री के सभी प्रयासों के बाद भी राजनीतिक स्वार्थ, अहंकार व सामंतवादी मानसिकता से त्रस्त परिवारवादी राजनीतिक दलों ने यह बिल पारित नहीं होने दिए। यदि यह विधेयक पारित हो जाते तो यह सत्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बन जाता।

विधेयक को दो तिहाई मत न मिलने पर विरोधी दल ऐसे आनंदित हो रहे हैं जैसे उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार गिरा दी हो। वो इसे मोदी की हार कह रहे हैं और यही विरोधी दलों ने एक राजनीतिक भूल है। महिला आरक्षण बिल भाजपा के लिए “चित भी मेरी – पट भी मेरी” वाला खेल बन गया है और पार्टी इस विषय को लेकर आक्रामक रूप से जनता के बीच में जा रही है। सदन में सभी विरोधी दलों ने परिसीमन और आरक्षण को लेकर भ्रम व झूठ का मायाजाल फैलाया। कुछ दलों ने जातीय जनगणना पर झूठ बोला और एससी- एसटी, ओबीसी, दलित आदिवासी व मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग कर डाली।

समाजवादी पार्टी ने दो कदम आगे जाकर 33 प्रतिशत आरक्षण के अंदर ही मुस्लिम महिलाओं के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए बिल को असंवैधानिक बताकर अपने मुस्लिम तुष्टिकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाया। वास्तविकता यह है कि धर्म आधारित आरक्षण संविधान के विरुद्ध है, जिसका असफल प्रयास कुछ दक्षिणी राज्यों में किया गया था जिसे, जिसे सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। वहीं यदि परिसीमन करने वाला बिल और महिला आरक्षण बिल पारित हो जाते तो जनसंख्या वृद्धि के अनुसार 2029 में महिला सांसदों की संख्या 272 हो जाती और देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक व्यापक परिवर्तन दिखाई पड़ता।

विरोधी दलों ने लोकसभा में यह विधेयक गिरा दिया है, लेकिन अब यह उनके लिए, “चिड़िया चुग गई खेत” वाली कहावत सिद्ध करने जा रहा है। भाजपा ने इसे अपने पक्ष में बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया है। इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करके अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस का काला चिट्ठा खोलकर विस्तारपवूर्वक देशवासियों के समक्ष रखा और बताया कि किस प्रकार कांग्रेस ने सभी सुधारवादी प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिवारवादी पार्टियों को डर है कि अगर नारी सशक्त हो गई, तो इनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहाकि हमारा अत्मबल अजेय है, हमारे प्रयास रुकेंगे नहीं। देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति आशीर्वाद हमारे साथ है और हम इस संकल्प को पूरा करके रहेंगे।

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बंगाल और तमिलनाडु जहां अभी विधानसभा का मतदान शेष है वहां प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह सहित भाजपा के सभी स्टार प्रचारक अपनी रैलियों में यह मुद्दा आक्रामक ढंग से उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित बीजेपी व राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री महिला आरक्षण पर प्रेस वार्ता करके राज्यों में विपक्षी व क्षेत्रीय दलों को बेनकाब कर रहे हैं। महिला आरक्षण बिल पास न होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसद में उस दिन द्रौपदी के चीरहरण जैसा दृश्य था। योगी ने कहा कि अगर ये बिल पारित हो जाता तो महिलाओं को उनका हक मिलता लेकिन इंडी गठबंधन के कारण ऐसा नहीं हो सका।

यदि यह विधेयक सर्वसम्मति से पास हो जाता तो स्वाभाविक रूप से इसका श्रेय पूरे सदन व सभी राजनीतिक दलों को मिलता, विरोधी दलों ने एक बहुत बड़ा अवसर खो दिया है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक दृष्टि से राजग गठबंधन को स्पष्ट बढ़त दी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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