क्या शादी के बाद महिला की न का कोई मोल नहीं, चिरैया और समाज का वो सच जिसे हम देखना नहीं चाहते

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Newschuski Digital Desk: क्या शादी का मतलब औरत की रजामंदी का खत्म हो जाना है? इसी चुभते हुए सवाल को केंद्र में रखकर एक नई वेब सीरीज आई है ‘चिरैया’। यह सीरीज उस ‘मैरिटल रेप’ (वैवाहिक बलात्कार) की बात करती है, जिसे हमारा समाज अक्सर बंद कमरों की बात कहकर नजरअंदाज कर देता है। सीरीज की कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसकी अरेंज मैरिज होती है, लेकिन उसका पति उसकी मर्जी के बिना बार-बार शारीरिक संबंध बनाता है। वह लड़ना चाहती है, कानून की मदद लेना चाहती है, लेकिन समाज और सिस्टम दोनों उसे बेबस कर देते हैं।

आंकड़े जो डराते हैं, NFHS-5 का खुलासा

भले ही लोग मैरिटल रेप को अस्तित्वहीन मानें, लेकिन केंद्र सरकार का नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (2019-21) कुछ और ही कहानी बयां करता है। सर्वे के मुताबिक, 32% शादीशुदा महिलाओं (18-49 साल) ने कभी न कभी पति की शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा झेली है।

इनमें से 6.3% महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने सीधे तौर पर ‘यौन हिंसा’ का सामना किया है। 5% महिलाओं ने बताया कि उनके पति ने उनके साथ मारपीट कर जबरदस्ती संबंध बनाए।

शहर बनाम गांव, कहाँ है ज्यादा खतरा

सर्वे बताता है कि गांवों में रहने वाली महिलाएं (6.9%) शहरों (4.8%) के मुकाबले यौन हिंसा का ज्यादा शिकार होती हैं। साथ ही, पति के शराबी होने पर हिंसा की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। करीब 25.5% पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उनके पति अक्सर शराब के नशे में होते हैं।

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मदद के लिए हाथ उठाने वाले भी कम

‘चिरैया’ सीरीज में एक दृश्य है जहाँ लड़की अपनी जेठानी से आपबीती सुनाती है, तो बदले में उसे थप्पड़ मिलता है। उसकी माँ भी उसे वापस ससुराल भेज देती है। हकीकत भी कुछ ऐसी ही है।

केवल 14% महिलाएं ही अपने साथ हो रही ज्यादती के खिलाफ किसी से मदद मांग पाती हैं।

इनमें से भी 58% अपने मायके और 14% ससुराल वालों से गुहार लगाती हैं।

चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि वकील या किसी सामाजिक संगठन से मदद मांगने वाली महिलाओं का प्रतिशत शून्य (0) है।

पुरुषों की सोच और वाजिब ठहराती मानसिकता

सर्वे में कुछ पुरुषों की सोच भी सामने आई जो बेहद चिंताजनक है।

10% पुरुष मानते हैं कि अगर पत्नी संबंध बनाने से मना करे, तो उसके साथ मारपीट करना सही है।

12.2% पुरुषों का कहना है कि वे पत्नी की मर्जी के बिना भी जबरदस्ती संबंध बना सकते हैं।

19% पुरुषों को लगता है कि मना करने पर पत्नी को डांटना-फटकारना उनका हक है।

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कानून की दहलीज पर अटकी इंसाफ की उम्मीद

भारत में अगर कोई पराया मर्द जबरदस्ती करे तो वह रेप है, लेकिन पति करे तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 में एक अपवाद है, जो कहता है कि यदि पत्नी की उम्र 18 साल से ऊपर है, तो पति का कृत्य रेप नहीं माना जाएगा।

केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि इसे अपराध घोषित करने से शादी जैसी पवित्र संस्था अस्थिर हो सकती है। इसी विडंबना के बीच ‘चिरैया’ की मुख्य किरदार एक उम्मीद जगाती है- मेरे साथ जो हुआ है, उसके खिलाफ कानून बनने तक मैं इंतजार करूंगी।

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