Chhath Puja 2026: कब से शुरू होगा छठ महापर्व, जानें नहाय-खाय, खरना और संध्या-अर्घ्य की तारीख व शुभ मुहूर्त
Chhath Puja 2026: छठ पूजा का महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती पूरी श्रद्धा और नियम-निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान भगवान सूर्य को डूबते और उगते समय अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि छठी मैया और सूर्य देव की आराधना से संतान सुख मिलता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और अंत में उषा अर्घ्य की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान व्रती करीब 36 घंटे तक कठिन निर्जला उपवास रखते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में छठ पूजा कब मनाई जाएगी और चारों दिनों के पूजा कार्यक्रम का शुभ समय क्या है।
Chhath Puja 2026 Date: 15 नवंबर को मनाई जाएगी छठ पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 14 नवंबर 2026 को रात 11 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 16 नवंबर को रात 2 बजे होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, छठ पूजा का मुख्य पर्व 15 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। हालांकि, चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ हो जाएगी।
छठ पूजा पर बनेंगे सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग
साल 2026 में छठ महापर्व के तीसरे दिन यानी 15 नवंबर को दो शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण होगा। पंचांग के मुताबिक, दोनों योग सुबह 6 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 28 मिनट तक रहेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करना फलदायी माना जाता है। ऐसे में संध्या अर्घ्य के दिन इन योगों का विशेष महत्व रहेगा।
Chhath Puja 2026 Calendar: चार दिनों का पूरा कार्यक्रम
पहला दिन: नहाय-खाय (13 नवंबर, शुक्रवार)
छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर, शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ होगी। इस दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। परंपरा के अनुसार, व्रती सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इसी दिन से छठ व्रत के नियमों का पालन शुरू हो जाता है और पूजा की तैयारियां की जाती हैं।
दूसरा दिन: खरना (14 नवंबर, शनिवार)
छठ पूजा का दूसरा दिन 14 नवंबर, शनिवार को होगा। इस दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि रात 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम को पूजा-अर्चना के बाद गुड़ से बनी खीर और अन्य प्रसाद ग्रहण किया जाता है। खरना के बाद करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जो उषा अर्घ्य के बाद पूरा होता है।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (15 नवंबर, रविवार)
15 नवंबर को छठ महापर्व का सबसे प्रमुख दिन होगा। इस दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि पर व्रती नदी, तालाब या अन्य जलाशयों के किनारे पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। शाम 5 बजकर 28 मिनट पर संध्या अर्घ्य का समय निर्धारित है। इस दौरान सूर्य देव और छठी मैया की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। व्रती परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करेंगे।
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चौथा दिन: उषा अर्घ्य और व्रत पारण (16 नवंबर, सोमवार)
छठ महापर्व का समापन 16 नवंबर, सोमवार को होगा। कार्तिक शुक्ल सप्तमी तिथि पर सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन सुबह 6 बजकर 44 मिनट पर अर्घ्य देने का समय बताया गया है। सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती पूजा संपन्न करेंगे और प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगे।
Chhath Puja 2026: तारीख और मुहूर्त एक नजर में
पूजा का दिन तारीख समय
नहाय-खाय 13 नवंबर, शुक्रवार चतुर्थी तिथि रात 8:42 बजे तक
खरना 14 नवंबर, शनिवार पंचमी तिथि रात 11:23 बजे तक
संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार शाम 5:28 बजे
उषा अर्घ्य 16 नवंबर, सोमवार सुबह 6:44 बजे
नोट: पूजा और अर्घ्य का स्थानीय समय सूर्योदय-सूर्यास्त तथा क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।
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