हरियाणा की 37वीं बिरादरी बना पूर्वांचल समाज: स्वामी गुरु शिवाधर दुबे ने उमाशंकर राय के बयान का किया समर्थन
चंडीगढ़/गुरुग्राम: हरियाणा की पवित्र भूमि पर सामाजिक समरसता और भाईचारे की एक नई व ऐतिहासिक मिसाल देखने को मिल रही है। हाल ही में पूर्वांचल जिलाध्यक्ष श्री उमाशंकर राय द्वारा सार्वजनिक मंच से पूर्वांचल समाज को हरियाणा की 37वीं बिरादरी के रूप में संबोधित किया गया था। उनके इस विचार का श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट के संस्थापक व सचिव, पूर्वांचल संत शिरोमणि स्वामी श्रीगुरु शिवाधर दुबे महाराज ने पूर्ण समर्थन करते हुए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है।
स्वामी श्रीगुरु शिवाधर दुबे महाराज ने अपने आध्यात्मिक संदेश में कहा कि हरियाणा की ऐतिहासिक पहचान हमेशा से छत्तीस बिरादरी के आपसी प्रेम, सौहार्द और एकजुटता से रही है। लेकिन जब इस पवित्र माटी में अपनी निष्ठा, समर्पण और कड़ा परिश्रम करने वाले पूर्वांचल समाज का संगम होता है, तो यह परिवार पूर्ण होकर 37वीं बिरादरी का रूप धारण कर लेता है। पूर्वांचल के लोगों ने अपने खून-पसीने से इस धरा को सींचा है और प्रदेश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है।
मालिक ईश्वर का निमित्त और मजदूर सच्चा कर्मयोगी
स्वामी ने मालिक और मजदूर के गहरे आध्यात्मिक संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों के बीच केवल व्यवसाय का रिश्ता नहीं, बल्कि पसीने और विश्वास का अटूट बंधन है। मालिक केवल व्यापार या उद्योग चलाने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि परमात्मा का वह माध्यम है जो किसी जरूरतमंद के घर का चूल्हा जलाने का आधार बनता है और उसे परिवार की तरह छत्रछाया प्रदान करता है। मजदूर केवल शारीरिक श्रम करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह सच्चा कर्मयोगी है जो तपती धूप और कड़ाके की ठंड में अपने कड़े तप से दूसरों के सपनों की इमारत खड़ी करता है।
इसे भी पढ़ें: UP में अब बाइक पर पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट अनिवार्य
अपने भावुक संदेश में स्वामी ने कहा, जब गाँव की चौखट छोड़ते वक्त पूर्वांचल के मजदूर की आँखों में अपनों से दूर होने के आँसू होते हैं, और हरियाणा की माटी पर कोई मालिक उसके कंधे पर हाथ रखकर कहता है कि यह भी तेरा ही घर है, तो वही पल ईश्वर का साक्षात रूप बन जाता है। मालिक के बिना मजदूर का चूल्हा नहीं जल सकता और मजदूर के बिना मालिक का कोई संकल्प सिद्ध नहीं हो सकता। दोनों एक ही गाड़ी के दो पहिये हैं।
क्षेत्रवाद से ऊपर उठने का आह्वान
स्वामी ने पूर्वांचल जिलाध्यक्ष उमाशंकर राय की सराहना करते हुए कहा कि मंच से ’37वीं बिरादरी’ का नाम लेना केवल एक वक्तव्य नहीं, बल्कि लाखों मेहनतकशों के सम्मान और स्वाभिमान की बुलंद आवाज है। राय जी ने जिस सत्य को समाज के सामने रखा है, वह भाईचारे और सौहार्द की एक नई इबारत लिखेगा। स्वामी जी ने सभी प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि जात-पात, भाषा और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर इस 37वीं बिरादरी के रिश्ते को मजबूत करें और हरियाणा की तरक्की में अपना योगदान दें।
इसे भी पढ़ें: भारत के डिजिटल जीवन की भाषा बने हिंदी : प्रो. संजय द्विवेदी
