एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक को पुलिस ने किया गिरफ्तार, 25 साल बाद खुला राज
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके से एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक (असली नाम सलीम खान) को गिरफ्तार कर लिया है। सलीम पर 1995 में दिल्ली के गोकुलपुरी क्षेत्र में एक व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे के अपहरण और हत्या का गंभीर आरोप था। 1997 में अदालत ने उसे आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। साल 2000 में वह पेरोल (जमानत) पर जेल से बाहर आया और फिर कभी वापस नहीं लौटा – तब से वह फरार चल रहा था। अब करीब एक चौथाई सदी बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया है।
शामली, मेरठ और गाजियाबाद में बदलता रहा नाम और पता
सलीम ने पिछले 25 वर्षों में कभी भी अपनी असली पहचान उजागर नहीं होने दी। वह ‘एक्स-मुस्लिम’ सलीम वास्तिक के झूठे नाम और पहचान के साथ शामली, मेरठ और गाजियाबाद जैसे शहरों में छिपकर रहता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह बेहद सतर्कता से रहता था और अपने किसी भी पुराने संपर्क से जुड़ने से बचता था। 2000 में जेल से बाहर निकलने के बाद उसने कभी भी अपना असली नाम ‘सलीम खान’ इस्तेमाल नहीं किया, जिससे पुलिस उसे ट्रैक नहीं कर पाई।
फरवरी में हुआ था जानलेवा हमला
बीती 27 फरवरी को सलीम वास्तिक पर एक बड़ा जानलेवा हमला हुआ था। कट्टरपंथी विचारधारा वाले दो युवकों ने हेलमेट पहनकर उसके ऑफिस में घुस आए और चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमलावरों ने खासतौर पर सलीम की गर्दन को निशाना बनाया था। सीसीटीवी फुटेज में यह पूरी वारदात कैद हो गई थी। गंभीर रूप से घायल सलीम को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत काफी नाजुक रही। कई दिनों के इलाज के बाद वह ठीक हुआ और अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

एनकाउंटर में ढेर हुए दोनों हमलावर
सलीम पर हुए इस हमले का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू की। जांच में पता चला कि दोनों हमलावर सगे भाई थे जीशान और गुलफाम। पुलिस ने दोनों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया, और बाद में दोनों आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया। हालांकि, इस एनकाउंटर और हमले के पीछे के सटीक कारणों का अभी पूरी तरह से खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन सलीम के अतीत और उसके बदले हुए धर्म को इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
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हमले के बाद खुली पुरानी फाइल
सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के बाद उसके अतीत पर फिर से गौर किया जाने लगा। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने साल 1995 के उस पुराने अपहरण-हत्या मामले की फाइल खोली, जिसमें सलीम दोषी करार दिया गया था। हालांकि पहले भी उसकी तलाश जारी थी, लेकिन ताजा हमले की घटना और मीडिया में आई सुर्खियों के बाद पुलिस सक्रिय हुई। तकनीकी सर्विलांस और मानवीय सूचनाओं के आधार पर सलीम का ठिकाना गाजियाबाद के लोनी में पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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