बाल सुनहरे भारत के
निर्माता और निदेशक हैं।
वे जो भी स्वप्न संजोएंगे
भावी के बड़े निवेशक हैं।।

उनके हृदयों में हो भारत
भारत की घनीभूत पूंजी।
ऋषियों का उच्चासन हो
आत्म बोध की हो कुंजी।।

ज्ञान और विज्ञान लिए
प्रज्ञान शोध तक वे जायें।
ब्रह्मांड में सुख शांति रचे
सामर्थ्य यहां भारत आए।।

आओ हम सब मिलकर
संकल्प और सिद्धि पायें।
भारत दीप जिले उज्ज्वल
दुनियां को ये राह दिखाएं।।

-बृजेंद्र

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