सड़कों के आंदोलन से लेकर अकादमिक गलियारों तक चर्चा, जानिए कौन हैं नेहा बोरा

Neha Bora

Newschuski Digital Desk: देश के शैक्षणिक संस्थानों, छात्र आंदोलनों और सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में एक नाम नेहा बोरा (Neha Bora) का भी है। अपनी बेबाक आवाज, धरने-प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी और पुलिस हिरासत के दौरान वायरल हुए वीडियो के कारण वह लगातार सुर्खियों बनी हुई हैं।

हालांकि, उनकी पहचान केवल एक तेज-तर्रार छात्र नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक मजबूत और मेधावी अकादमिक पृष्ठभूमि भी रखती हैं। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएचडी की रिसर्च स्कॉलर होने के साथ-साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व भी संभाल रही हैं।

उत्तराखंड से ताल्लुक और छात्र राजनीति का सफर

मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली नेहा बोरा के पिता भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं। सेना की पृष्ठभूमि के कारण उन्हें बचपन में देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने और अध्ययन करने का अवसर मिला। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने छात्र हितों, शिक्षा के अधिकार और परिसरों में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए छात्र राजनीति का रास्ता चुना। वह पिछले लगभग एक दशक से आईसा संगठन से जुड़ी हुई हैं और पिछले दो वर्षों से इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रही हैं। हालिया छात्र आंदोलनों में उनकी मुखर उपस्थिति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है।

Neha Bora

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जेएनयू तक की अकादमिक यात्रा

नेहा बोरा की शैक्षिक यात्रा काफी समृद्ध रही है। उन्होंने अपनी स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी से ‘परफॉर्मेंस स्टडीज’ विषय में स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) की उपाधि प्राप्त की। इस पढ़ाई ने आगे चलकर थिएटर, कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में उनकी गहरी रुचि की नींव रखी।

मास्टर डिग्री के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में दाखिला लिया और वर्तमान में वह थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध कार्य कलात्मक और सांस्कृतिक संदर्भों में प्रदर्शन की भूमिका को समझने पर केंद्रित है। इस प्रकार, जहां एक ओर अकादमिक जगत में उनकी पहचान एक शोधार्थी और कला अध्येता की है, वहीं सार्वजनिक जीवन में वह छात्र अधिकारों की मुखर पैरोकार के रूप में उभरी हैं।

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने CJP की खोली पोल

इसे भी पढ़ें: यूपी में 3 महीने के भीतर होंगे पंचायत चुनाव, निवर्तमान ग्राम प्रधान बने रहेंगे प्रशासक

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NEWS CHUSKI के Facebook पेज को Like व Twitter व Instagram पर Follow करना न भूलें...