कीचड़ युक्त सड़क, गांव से निकलना हुआ दूभर

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प्रकाश सिंह

सुल्तानपुर: सुल्तानपुर जिले के ग्राम सभा सेमरौना के पूरे हनुमान का पुरवा क्षेत्र के पंचनाथ उपाध्याय के घर से सेमरौना डिहवा तक जाने वाली सड़क काफी जर्जर हो गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बरसात का सीजन होने पर के कारण सड़कों के गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है। सड़क की इस स्थिति से नागरिक खासे नाराज हैं। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद भी सड़क नहीं सुधर पाई है।

सुल्तानपुर जिले में सड़कों की जाल बिछा कर विकास के दावे किए जा रहे हैं। गांव-गांव में आवागमन के लिए सड़कें बनाई जा रहीं हैं। पर देखरेख के अभाव एवं गुणवत्ता में कमी के चलते ये सड़क काफी जर्जर हो गई हैं और अब ये जनता के लिए परेशानी का सबब बनकर आए दिन दुर्घटना को आमंत्रित करते रहती हैं। मजबूरी में जनता उन बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डाल कर यात्रा करने को मजबूर है। खास बात तो यह है कि इन सड़कों पर विकास का वादा करने वाले जनप्रतिनिधि भी यात्रा करते हैं। पर वे भी पद में आने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं।

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पंचनाथ उपाध्याय के घर से सेमरौना डिहवा तक को जोड़ने वाली सड़क काफी इंतजार के बाद भी नहीं बन पा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बीच में करीब 500 मीटर की सड़क का काम काफी सालों से अटका हुआ है। काफी मांग के बाद सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। सड़क जगह-जगह से धंसने लगी। वर्तमान में इस सड़क की हालत यह है कि कई स्थानों पर सड़क है या नहीं, इसका पता ही नहीं चलता। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। इस मार्ग पर दर्जनों यात्री दो पहिया और चार पहिया वाहन चलते हैं। जहां यात्री यात्रा से पहले भगवान को याद करते है वही ग्रामीणों का कहना है की बात को पिछले पांच सालों से रह रही ग्राम प्रधान अनीता प्रजापति व प्रधान प्रतिनिधि त्रिनेत्र पांडे से भी कहा गया मगर उनके सेहत पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ा।

सड़क तो सड़क गांव की नाली तक नहीं ठीक कराई गई, जिसके चलते सेमरौना ग्रामवासी डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस बात की शिकायत ग्रामीणों द्वारा विकास खंड अधिकारी को भी दी है। मगर मामले को प्रधान व प्रधान प्रतिनिधि द्वारा दबा दिया जाता है। मौसम बरसात का हो या न हो लेकिन हमेशा पानी श्रारे रहने से ग्रामीणों को चलना मुश्किल हो गया है। इसको लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है।

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