पानीपत में पूर्वांचल और बिहार के प्रवासियों का प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर आंदोलन जारी
पानीपत: पानीपत केवल एक प्रमुख औद्योगिक शहर ही नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आकर यहां बसने वाले लाखों मेहनतकश लोगों की कर्मभूमि भी है। इस आबादी में पूर्वांचल और बिहार से ताल्लुक रखने वाले लोगों की संख्या बहुत बड़ी है, जो वर्षों से पानीपत के विकास और इसकी अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान देते आ रहे हैं। ऐसे में अपने मूल राज्यों से जुड़ने के लिए बेहतर रेल सुविधाओं की मांग करना कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि एक बुनियादी और जायज़ जरूरत है।
इसी जनसेवा और सनातन संस्कृति के मान-सम्मान की रक्षा हेतु पूर्वांचल समाज एवं श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट कूटानी रोड पानीपत, हरियाणा के समस्त प्रबुद्ध जनों ने लघु सचिवालय स्थित शहीदी स्मारक पर अमर शहीदों को नमन कर अनुशासित एवं शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए सरकार एवं रेल प्रशासन के समक्ष अपनी निम्नलिखित 6 बुनियादी मांगें रखी हैं।
प्रमुख 6 जनहितैषी मांगें
गरीब रथ एक्सप्रेस का ठहराव: आम एवं मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधा हेतु गरीब रथ ट्रेन का ठहराव पानीपत जंक्शन पर तुरंत प्रभाव से दिया जाए।
पर्व-त्योहारों पर विशेष ट्रेनें: छठ पूजा, दिवाली और होली जैसे प्रमुख त्योहारों पर पानीपत जंक्शन से पूर्वांचल व बिहार के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित किया जाए।
पुरुषोत्तम व शहीद एक्सप्रेस का विस्तार/मार्ग बदलाव: पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का संचालन पानीपत जंक्शन से शुरू किया जाए तथा शहीद एक्सप्रेस को पानीपत के रास्ते संचालित किया जाए।
बिहार हेतु 2 नई सीधी ट्रेनें: पानीपत से सीधे बिहार (जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वाराणसी/गोरखपुर मार्ग) के लिए कम से कम 2 (दो) नई नियमित ट्रेनों की शुरुआत की जाए।
वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव: दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव पानीपत जंक्शन पर तय किया जाए।
जनरल डिब्बों में वृद्धि: पानीपत से होकर गुजरने वाली पूर्वांचल जाने वाली सभी ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि गरीब एवं आम यात्री गरिमापूर्ण तरीके से यात्रा कर सकें।
यात्रियों की बढ़ती संख्या और ट्रेनों का ठहराव कम होने से बढ़ी परेशानी
आज से लगभग दस साल पहले पानीपत रेलवे स्टेशन पर पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली करीब आठ महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव होता था, जबकि उस समय शहर की आबादी आज की तुलना में कम थी। पिछले वर्षों में शहर की आबादी और औद्योगिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं, लेकिन रेल सुविधाओं के मामले में स्थिति इसके विपरीत है और आज बिहार को जोड़ने वाली मात्र एक प्रमुख ट्रेन के ठहराव की बात सामने आती है। ट्रेनों के ठहराव में आई इस भारी कमी के कारण हजारों-लाखों यात्रियों को दूसरे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनका समय, पैसा और परेशानी तीनों बढ़ते हैं तथा त्योहारों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
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पूर्वांचल समाज की स्पष्ट मांग
यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक वास्तविक जनसमस्या के समाधान के लिए है। समाज की मांग है कि पानीपत में पूर्वांचल और बिहार को जोड़ने वाली प्रमुख ट्रेनों का उचित ठहराव तुरंत बहाल किया जाए तथा यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई ट्रेनों का संचालन भी सुनिश्चित किया जाए। समय के साथ जैसे-जैसे पानीपत की आबादी और यात्रियों की संख्या बढ़ी है, उसी अनुपात में रेल सुविधाओं का भी विस्तार होना चाहिए, ताकि लाखों लोग अपने परिवार और जड़ों से सहज रूप से जुड़े सकें।
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