उमा भारती का लव जिहादी प्रेम

हिंदूवादी उमा भारती से नाराज ही नहीं हैं बल्कि आक्रोशित भी हैं। आखिर क्यों? इसलिए की कट्टर हिंदूवादी शाहनवाज हुसैन को लव जिहादी मानते हैं और इस लव जिहादी के बेटे के निकाह के अवसर पर समर्थन में उमा भारती ने बहुत ही भावुक पोस्ट लिखी है।मेरे पास लव जिहाद के खिलाफ लड़ने वाले दर्जनों हिंदू वादियों के कॉल आए और उन सभी ने पूछा कि बीजेपी के नेताओं को क्या हो गया है। इनकी पसंद लव जिहादी ही क्यों होते हैं? लव जिहादी की बीजेपी में प्रगति दिन दुगनी और रात चौगुनी क्यों होती है? कभी हिंदुत्व के लिए दहाड़ने वाली और सनातन सुरक्षा का नायक होने का दावा करने वाली उमा भारती लव जिहादी की बहन और उसके बच्चे की बुआ कैसे बन जाती हैं?
शाहनवाज हुसैन के बेटे के निकाह पर उमा भारती ने कहा था कि मैं शाहनवाज हुसैन के बेटे की बुआ हूँ, बुआ के रूप में उन्हें गर्व है। शाहनवाज हुसैन के गुणगान में अन्य बातें भी कही थीं। जानना यह भी जरूरी है कि शाहनवाज हुसैन को एक रैप और लव जिहाद प्रकरण में पीड़िता को धमकी देने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट से समन भी मिला था।
शाहनवाज हुसैन के बेटे का निकाह किससे हुआ है, यह भी जान लीजिये। शाहनवाज हुसैन के बेटे का निकाह हरियाणा कांग्रेस के विधायक अकरम खान की बेटी के साथ अभी-अभी हुआ है। हिंदूवादी हरियाणा के मुस्लिम विधायकों के खिलाफ अभियान चलाते रहते हैं। विधायक अकरम खान पर कई प्रकार की बातें है। हरियाणा में गौ सेवकों और गौ रक्षकों की हत्याएं हुई हैं। हरियाणा के मेवात में गौ चोरों का आतंक है, गौ चोर हथियार बंद होते हैं, पुलिस भी गौ चोरों से डायरेक्ट भिड़ंत से परहेज करती है। गौ चोर मुस्लिम ही होते हैं। सबसे चिंता की बात डेमोग्राफिक चेंज की है, हरियाणा का मेवात क्षेत्र दूसरा कश्मीर बन चुका है, जिस तरह से मुस्लिम हिंसा का आतंक कश्मीर में है उसी प्रकार का मुस्लिम हिंसा का आतंक मेवात क्षेत्र में है। थोड़ा ही अंतर जरूर है।
कश्मीर में हिंदुओं का निष्कासन और सफाया स्पष्ट हुआ है पर मेवात क्षेत्र में हिंदुओं का सफाया अस्पष्ट है, साइलेंट है। मजबूर किया जाता है कि हिंदू मेवात क्षेत्र को खाली कर दे या फिर इस्लाम स्वीकार कर लें। आपको फिर से याद दिलवा रहा हूं कि मेवात के मुसलमानों ने हिंदुओं के शिव यात्रा पर किस तरह से हमला किया था। हजारों शिव भक्तों को घेरकर हमला हुआ था, पुलिस पर भी हमला हुआ था, थानों को सरेआम जलाया गया था। मेवात क्षेत्र में आज हिंदुओं का सफाया तेजी से हुआ है। आपको यह बता दूं कि मेवात क्षेत्र के पचास से अधिक गांव हिंदू विहीन हो गए हैं। मेवात क्षेत्र के हिंदुवादियों का कहना है कि कांग्रेसी विधायक अकरम खान सहित हरियाणा के सभी मुस्लिम विधायक और मुस्लिम नेता मेवात में हिंदुओं को भागने में एकमत हैं और अभियानी भी है। गोपनीयता के साथ अकरम खान सहित हरियाणा के सभी मुस्लिम विधायक जिहादियों और गौ तस्करों को संरक्षण प्रदान करते हैं, आर्थिक वित्त पोषण करते हैं।
उमा भारती यह दावा करती है कि हमने शाहनवाज हुसैन का राजनीतिक जीवन संवारा है। हमने उसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया फिर उसकी बीजेपी की राजनीति में दिन दुगनी और रात चौगुनी प्रगति होती चली गई। शाहनवाज हुसैन का प्रारंभिक राजनीति जीवन सड़क छाप का था। उस दौर के पत्रकार इनकी काफी कुछ सच्चाई जानते हैं। इनकी तंगहाली और मंजनू टाइप की छवि के कई किस्से मीडिया बाजार में तैरते रहे हैं। यह सही है कि उमा भारती ने ही शाहनवाज हुसैन को बीजेपी की राजनीति में स्थापित किया था। उमा भारती का मजबूत समर्थन नहीं मिला होता तो फिर वह बीजेपी की राजनीति में स्थापित नहीं होता और न ही चमकता। शाहनवाज हुसैन को लेकर बीजेपी के अंदर उमा भारती का विरोध भी हुआ था। कहा यह जाता है कि तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने उन्हें फटकारा भी था और कहा था कि उड़ो मत, शुचिता और नैतिकता सीखो, जनता के बीच जाओ और मजबूत हैसियत बनाओ। उस दौरान शाहनवाज हुसैन मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सक्रियता की राह पर चल रहे थे, जो मुरली मनोहर जोशी को स्वीकार नहीं था।
उमा भारती का यह भी दावा है कि शाहनवाज हुसैन की शादी उसने ही कराई थी। यह भी कहा जाता है कि उसकी शादी कोई प्रेम विवाह नहीं था, बल्कि लव जिहाद ही था। उस दौर में लव जिहाद का शोर आज की तरह नहीं था। लव जिहाद का शोर उठ ही रहा था, उस पर आज की तरह लोग गम्भीर नहीं थे और न ही सोशल मीडिया का दौर था। इस कारण यह लव जिहाद का मामला नहीं बन सका। कुछ लोग फिर भी लव जिहाद का प्रसंग बनाना चाहते थे जो बीजेपी के कट्टर लोग थे। लेकिन उन सभी को उमा भारती ने डपट दिया था, हिंदू मुस्लिम एकता का पाठ पढ़ाया था और बीजेपी से बाहर करने का अल्टीमेटम जारी कर दिया था। उस दौर में बीजेपी के अंदर उमा भारती की तूती बोलती थी और उनसे दुश्मनी लेने का अर्थ बीजेपी से बाहर होना था।
फिर भी शाहनवाज के ससुराल पक्ष के लोग राजीमंद नहीं थे और मुस्लिम दामाद स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। लड़की पक्ष ब्राह्मण जाति से आते थे, लड़की पक्ष को यह लगता था कि उनकी बेटी मुस्लिम से शादी करेगी तो फिर उनकी बड़ी बदनामी होगी। उनकी नाक कट जाएगी, उनका सामाजिक बहिष्कार हो सकता है, उन्हें ब्राह्मण कुल से प्रतिबंधित किया जा सकता है। ब्राह्मण जाति मुस्लिम तो क्या हिंदू धर्म की नीची जातियों में भी शादी विवाह करना स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए यह प्रसंग काफी गम्भीर हो गया था और सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया था। इस प्रशंग पर उमा भारती ने इस्लामिक सक्रियता दिखाई थी, इस्लामिक विजन दिखाया था, शाहनवाज हुसैन के पक्ष में कूदी थी, रक्षा कवच बनी थी। उमा भारती लड़की के घर पहुंच गईं और कहती हैं कि तुम्हारी बेटी राज करेगी। तुम्हारी बेटी हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक बनेगी और रातों रात देश में विख्यात हो जाएगी, सेलिब्रिटी बन जाएगी।
उस दौर में उमा भारती फायरब्रांड नेता हुआ करती थीं, अपनी तीखी प्रतिक्रिया से वह हिंदुओं की नायक बन चुकी थीं। उमा भारती का किसी के घर पहुंचना ही काफी था, गर्व की बात होती थी, प्रतिष्ठा की बात होती थी, जीवन सफल होने की बात होती थी। उमा भारती ने लड़की के परिजनों को गारंटी दी थी कि शाहनवाज हुसैन की राजनीतिक जीवन वही संवारेगी। लड़की को धर्म परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा। पर अब शाहनवाज हुसैन की पत्नी पूरी तरह से हिंसक इस्लामिक रंग में रंग चुकी है। वह सिर्फ दिखावे के लिए हिंदू है, शाहनवाज हुसैन सही में हिंसक इस्लाम का सहचर नहीं है, तो फिर उसने अपने किसी बच्चे का हिंदू नाम क्यों नहीं रखा, अपने किसी बच्चे को हिंदू क्यों नहीं बनाया? इस पर उमा भारती का क्या उत्तर हो सकता है?

शाहनवाज हुसैन ही नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार ही लव जिहादी है और हिंदुत्व का दुश्मन भी है। इसका प्रमाण भी है। पुलिस जांच भी चली थी, न्यायिक परीक्षण भी हुआ है, मोदी सरकार और शाहनवाज हुसैन का राजनीतिक प्रभाव के कारण मामला दब गया। पूनम पांडे का यहां उल्लेख करना बहुत जरूरी है और शाहनवाज हुसैन को लव जिहादी साबित करने के लिए अनिवार्य है। पूनम पांडे बिहार की लड़की है, वह दिल्ली में पढ़ने आई थी, पढ़ने में तेज थी और सामाजिक कार्यक्रमों में भी उसकी सक्रियता रहती थी। एक कार्यक्रम में उसकी मुलाकात शाहनवाज हुसैन से होती है। शाहनवाज हुसैन अपने आवास पर आने का पूनम को आमंत्रण को देता है। पूनम पांडे जब शाहनवाज हुसैन के घर जाती है तो वहां उसकी मुलाकात शाहनवाज हुसैन के भाई से होती है।
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शाहनवाज हुसैन का भाई अपनी राजनीतिक शक्ति और अपनी भड़कीली लाइफस्टाइल का पहिया घूमता है और उसका शिकार पूनम पांडे हो जाती है। पूनम पांडे से जबरदस्ती होती है, धमकी पिलाई जाती है, उसका कौमार्य भंग कर दिया जाता है। जब इसकी शिकायत वह करती है तब शाहनवाज हुसैन कहता है कि तुम लोग नौजवान हो, ऐसा हो ही जाता है। तुम दो कम कर सकती हो, एक कुछ पैसे लेकर दफा हो जाओ, दूसरा यह कि मुस्लिम बन जाओ। किसी मुस्लिम लड़के से तुम्हारी शादी करा दी जाएगी। पूनम पांडे ने न पैसे लेने के लिए तैयार होती है और न ही मुस्लिम बनने के लिए तैयार होती है। फिर उसे जीवन गंवाने की धमकी दी जाती है। वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराती है, पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। हार कर वह कोर्ट जाती है। शाहनवाज हुसैन की राजनीतिक प्रभाव के कारण पूनम पांडे न्याय से वंचित हो जाती है। पूनम पांडे का साफ कहना है कि शाहनवाज हुसैन का पूरा परिवार हिंदू लड़कियों के प्रति जिहादी दृष्टि रखता है।
कट्टर हिंदुवादियों और लव जिहादी विरोधी हिंदू एक्टिविस्टों की यह बात तो पूरी तरह सत्य है कि उमा भारती जैसे बीजेपी के नेता लव जिहाद के खिलाफ हिंदुओं को लड़ने और सावधान रहने की बात करते हैं, लेकिन वे खुद लव जिहादियों की चरण वंदना करते हैं। शाहनवाज हुसैन पर लव जिहाद करने और कराने का स्पष्ट आरोप है। दिल्ली हाईकोर्ट से उसे इस संबंध में समन भी मिला था। इसके बावजूद भी शाहनवाज हुसैन पर उमा भारती गर्व कर रही है। उमा भारती को शाहनवाज हुसैन का महिमामंडन करने से बचना चाहिए था।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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