लॉरेंस बिश्नोई से बड़ा अपराधी है सलमान खान

टाइगर श्रॉफ पर तथाकथित लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के हमले के बाद कई प्रकार के प्रश्न उठे हैं और फिल्मी सितारों के प्रति बेकार की सहानुभूति प्रकट की जा रही है। क्या यह हमला सही में लॉरेंस बिश्नोई करा रहा है, जबकि वह साबरमती जेल में बंद है, जहां पर कड़ा पहरा लगा हुआ है। क्या सही में फिल्मी सितारे दूध के धुले हुए हैं, क्या फिल्मी सितारे अपराधी मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में फिल्मी सितारे जिहादी मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में फिल्मी सितारे पाकिस्तान परस्ती की मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में सनातन संहार की मानसिकता नहीं रखते हैं? देश की अस्मिता खोर है फिल्मी दुनिया।
मुंबई फिल्मी सितारे माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की उंगलियों पर नाचते थे। खासकर मुंबई फिल्मी हीरोइन दाऊद इब्राहिम के दरबार में नंगे नाचती थीं, संगीतकार संगत करते थे। उस काल का कोई ऐसी हीरोइन नहीं है जो दाऊद इब्राहिम के दरबार में नहीं नाची थी या फिर दाऊद इब्राहिम की चरणवंदना नहीं करती थी। सारे के सारे फिल्मी सितारे माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की चरणवंदना करते थे।
पाकिस्तान परस्ती भी देख लीजिए। दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ खान को पाकिस्तान ने अपना सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार दिया था। यह पुरस्कार दिलीप कुमार को पाकिस्तान परस्ती और मुम्बई फिल्मी दुनियां को जिहादी करन, इस्लामिक करन करने के लिए दिया गया था। कारगिल युद्ध के दौरान दिलीप कुमार से पाकिस्तानी पुरस्कार को वापस करने की मांग हुई थी, पर दिलीप कुमार ने पाकिस्तानी पुरस्कार वापस करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि दिलीप कुमार के लिए भारत एक काफ़िर देश था और काफ़िर को मदद करना इस्लाम में हराम है।
हिंदू धर्म का संहार करने को लेकर मुम्बई फिल्मी दुनिया सक्रिय रहती है, हिंसक रहती है। याद कीजिए गुनाहो का देवता फिल्म को। यह नाम हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए रखा गया था। गुनाह शब्द उर्दू, अरबी और फारसी का सम्मलित औलाद है। क्या कभी आपने किसी फिल्म का नाम गुनाहों का अल्ला देखा है? आमिर खान ने एक सीरियल बनाई थी, हिंदू धर्म के परम्पराओं पर अंधविश्वास बताकर खूब खिल्ली उड़ाई थी पर उसने इस्लाम की कुरीतियों और अंध विश्वास और जिहाद को बेपर्दा करना जरूरी नहीं समझा था। हिंदू धर्म को कलंकित करने के अनेक प्रक्रियाएं चली गई। जिन्होंने भी मुम्बई फिल्मी दुनिया के इस्लामीकरण और जिहादी करण के खिलाफ बात उठाई उन सभी को हाशिए पर खदेड़ दिया गया। उदाहरण के लिए अनुपम खेर, अभिजीत और गजेंद्र चौहान का नाम लिया जा सकता है।
सोनू निगम ने जब अजान के खिलाफ आवाज उठाई तब सोनू निगम के खिलाफ जिहादी हिंसक प्रक्रिया सक्रिय हो गई। उन्हें फिल्मी दुनियां में काम मिलना बंद हो गया। नसीरुद्दीन शाह की मुस्लिम परस्ती पर जब नाना पाटेकर ने आवाज उठाई तो फिर उन्हें फिल्मी दुनिया ने अलग-थलग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। गुलशन कुमार की हत्या आपको याद कराता हूं। गुलशन कुमार ने सनातनी भजनों की धूम मचा दी थी। फिल्मी दुनिया एक सनातनी को इस प्रकार सफल होते हुए देखना कैसे स्वीकार कर सकती थी। कई मुस्लिम संगीत कारों का भट्ठा बैठ गया था। नदीम संगीतकार के चोले में जिहादी था, हिंसक था। नदीम ने साजिश कर गुलशन कुमार की दिनदहाड़े हत्या करा देता है। नदीम अभी ब्रिटेन में रह रहा है। ऐसी कई हत्याएं मुंबई फिल्मी दुनिया में हो चुकी है।
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लॉरेंस बिश्नोई से बड़ा अपराधी और हिंसक सलमान खान है। सलमान खान सरेआम हिरणों की हत्या करता है, अवैध हथियार रखता है, मुंबई के फुटपाथ पर सोये हुए मजदूरों पर कार चढ़ाकर रौंद देता है। कई मजदूरों की हत्या कर देता है, सरेआम हीरोइनों को अगवा कर अपनी हवश मिटाता है। साथी कलाकारों को धमकी देता है। फिर भी पुलिस, कोर्ट और सरकार उसे सजा नहीं दिला पाती हैं।
जब कानून अंधा हो जाता है तब लॉरेंस बिश्नोई जैसा धमाल और उदाहरण सामने आता है। सलमान खान और अन्य फिल्मी दुनिया को सुधारने के लिए लॉरेंस बिश्नोई जैसा हीरो पैदा होता है। कई फिल्मों में भी यही दिखाया गया है। विश्नोई समाज का जंगल और जानवरों के प्रति सहानुभूति और स्नेह भी सर्वविदित है। हम लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की हिंसा का भी समर्थन नहीं करते हैं पर पुलिस, कोर्ट और सरकार अपनी-अपनी भूमिका निभाती तो फिर लॉरेंस बिश्नोई जैसी चुनौती सामने नहीं आती।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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