यूपी में पतियों की हत्या के जुर्म में दो पत्नियों और उनके प्रेमियों को सुनाई गई फांसी की सजा, जानें भारत में ऐसी कितनी महिलाओं हुई है फांसी

Meerut Husband Murder Case

Meerut Husband Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाले दो सनसनीखेज मामले सामने आए हैं, जहां महज तीन दिनों के भीतर अदालतों ने दो अलग-अलग मामलों में पतियों की हत्या करने वाली पत्नियों और उनके प्रेमियों को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। इन दोनों ही मामलों में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है।

पहला मामला: मुस्कान और साहिल ने सौरभ राजपूत के किए थे टुकड़े-टुकड़े

गत 14 अक्टूबर को मेरठ अदालत ने चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई। इस बहुचर्चित मामले में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे और उन्हें एक नीले रंग के ड्रम में भरकर छिपा दिया गया था। इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

Muskan and Sahil Case

दूसरा मामला: रविता और अमरदीप ने पति की हत्या कर रची सांप के काटने की झूठी कहानी

इस सनसनीखेज फैसले के ठीक दो दिन बाद यानी 16 अक्टूबर को मेरठ में एक और अदालत ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को पति अमित कश्यप की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई। इन दोनों ने मिलकर पहले अमित कश्यप का गला घोंटकर उसकी जान ली और फिर हत्या को हादसे या प्राकृतिक मौत का रूप देने के लिए बिस्तर पर एक सांप लाकर छोड़ दिया, ताकि सबको लगे कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है। हालांकि, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो गला घोंटकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज राज खुल गया और पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

भारत में महिला कैदियों को फांसी की सजा का कानूनी परिप्रेक्ष्य

इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद देश में महिला अपराधियों और उन्हें मिलने वाली सजा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत की विभिन्न जेलों में लगभग 21 महिला कैदी ऐसी हैं जिन्हें निचली या ऊपरी अदालतों से फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, और इनमें से एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता है।

आंकड़े बताते हैं कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में अब तक जितनी भी मौत की सजाएं सुनाई गई हैं, उनमें महिलाओं का प्रतिशत 3% से भी कम है। आजाद भारत में न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब तक केवल एक ही महिला को फांसी के फंदे पर लटकाया गया है।

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इतिहास में एकमात्र महिला, जिसे दी गई थी फांसी

आजाद भारत में एकमात्र महिला जिसे मौत की सजा पर अमल करते हुए फांसी दी गई थी, वह थीं रतन बाई जैन। रतन बाई जैन दिल्ली के एक फैमिली प्लानिंग क्लिनिक में मैनेजर के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें शक था कि क्लिनिक से जुड़ी तीन युवतियों का उनके पति के साथ अवैध संबंध है। इसी रंजिश और गुस्से में आकर उन्होंने उन तीनों लड़कियों के खाने-पीने की चीजों में जहर मिलाकर उनकी हत्या कर दी थी। निचली अदालत से लेकर उच्च स्तर तक इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) अपराध की श्रेणी में माना गया। तमाम अपीलें और दया याचिकाएं खारिज होने के बाद, 3 जनवरी 1955 को करीब 35 वर्ष की आयु में रतन बाई जैन को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी।

1955 के बाद से किसी महिला को नहीं दी गई है फांसी

वर्ष 1955 के बाद से पिछले सात दशकों में देश की अदालतों ने कई महिला अपराधियों को मौत की सजा सुनाई है—जैसे अमरोहा का बहुचर्चित शबनम अली मामला, या महाराष्ट्र की सीरियल किलर बहनें रेणुका शिंदे और सीमा गावित। हालांकि, कानूनी दांव-पेच, दया याचिकाओं (Mercy Petitions) और उम्रकैद में सजा तब्दील होने के कारण उन पर फांसी का अमल नहीं हो सका है। मेरठ के इन ताजा मामलों ने एक बार फिर से न्याय व्यवस्था और जघन्य अपराधों की गंभीरता को बहस के केंद्र में ला दिया है।

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