पहाड़ों की गुफाओं से लेकर समंदर के किनारे तक, पाकिस्तान में स्थित हैं हिंदू आस्था के 5 सबसे बड़े केंद्र
Famous Temples in Pakistan: इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान का नाम आते ही सामान्यतः एक विशेष धार्मिक परिदृश्य की तस्वीर उभरती है। हालांकि, बेहद कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इस सरहद पार भी सनातन धर्म से जुड़े कई प्राचीन और अत्यंत पवित्र स्थल आज भी सीना ताने खड़े हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म के पवित्रतम 51 शक्तिपीठों में से 3 शक्तिपीठ पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर मौजूद हैं। पहाड़ों की प्राकृतिक गुफाओं, ऊंचे शिखरों और समंदर के किनारों पर स्थित ये मंदिर सदियों पुरानी आस्था और इतिहास के प्रतीक हैं, जहां आज भी श्रद्धालु अपनी अगाध श्रद्धा के साथ शीश नवाते हैं।
बलूचिस्तान का हिंगलाज माता मंदिर, जहां गिरा था माता सती का मस्तक
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित हिंगलाज माता मंदिर वहां के सबसे बड़े और पवित्रतम हिंदू तीर्थ स्थलों में शुमार है। यह पाकिस्तान में स्थित 3 शक्तिपीठों (हिंगलाज, शिवहरकराय और शारदा पीठ) में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां माता सती का मस्तक (ब्रह्मरंध्र) गिरा था। एक ऊंचे पहाड़ की प्राकृतिक गुफा में विराजमान इस दिव्य स्थल पर हर साल ‘हिंगलाज यात्रा’ का आयोजन किया जाता है। इस वार्षिक यात्रा में भाग लेने के लिए दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसे पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिंदू धार्मिक पदयात्रा माना जाता है।

पंजाब का ऐतिहासिक कटास राज मंदिर, शिव के आंसुओं से बनी झील का रहस्य
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर परिसर वास्तव में कई प्राचीन मंदिरों का एक ऐतिहासिक समूह है। ये मंदिर एक विशाल और पवित्र झील के चारों ओर निर्मित हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के वियोग में जब भगवान शिव पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे, तब उनके नयनों से गिरे आंसू से इस पवित्र कुंड का निर्माण हुआ था। एक अन्य पौराणिक मान्यता यह भी है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर महादेव के सम्मान में मंदिर बनवाया था। हाल के वर्षों में भारत से भी सीमित संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए जाते रहे हैं।

सिंध की कालका पहाड़ियों में स्थित रहस्यमयी कालका गुफा मंदिर
सिंध प्रांत के अरोड़ा क्षेत्र स्थित कालका पहाड़ियों की प्राकृतिक गुफाओं में ‘कालका देवी मंदिर’ विराजमान है। ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस स्थल के बारे में स्थानीय मान्यता है कि देवी कालका इसी स्थान पर प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि हिंगलाज माता मंदिर की यात्रा के दौरान देवी ने इस स्थान पर विश्राम किया था। इस प्राकृतिक गुफा मंदिर की बनावट और धार्मिक आभा आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।

कराची के मनौरा तट पर स्थित ऐतिहासिक वरुण देव मंदिर
कराची स्थित मनौरा बीच पर बना वरुण देव मंदिर सिंधी हिंदू समुदाय के प्राचीन समुद्री इतिहास का साक्षी है। यह मंदिर जल के देवता भगवान वरुण को समर्पित है। प्राचीन काल में नाविक और व्यापारी किसी भी लंबी समुद्री यात्रा पर निकलने से पूर्व अपनी सुरक्षा और सफलता की प्रार्थना करने के लिए यहां विशेष पूजा-अर्चना करते थे। समय की मार से जर्जर हो चुकी इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित करने और इसके जीर्णोद्धार के लिए हाल के वर्षों में कई विशेष प्रयास किए गए हैं।

चोलिस्तान और सिंध की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम
चुरियो जबल की पहाड़ियों से लेकर मनौरा के सुरम्य समुद्र तट तक फैले ये प्राचीन मंदिर सिंध और आसपास के क्षेत्रों की बहुसांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। ये धार्मिक स्थल न केवल स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं, बल्कि उपमहाद्वीप के उस साझा इतिहास की गवाही भी देते हैं जो सदियों से आस्था और परंपराओं के माध्यम से आपस में जुड़ा हुआ है।
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