पुलिस ने विनोद साहनी पर कार्रवाई की होती तो न होती हत्या, घृणित टिप्पणी ने दिया घटना को अंजाम
प्रकाश सिंह
Vinod Sahani Murder Case: गोंडा जनपद के परसपुर थानाक्षेत्र के रेक्सडिया गांव निवासी 45 वर्षीय विनोद साहनी की हत्या मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आ चुकी है। हत्या के पीछे सोशल मीडिया पर अभद्र व घृणित टिप्पणी की बात सामने आ रही है। वहीं मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और थाना प्रभारी कमला शंकर चतुर्वेदी और शाहपुर चौकी प्रभारी अंकित सिंह को निलंबित कर दिया गया है। मामला चूकी पिछड़ी जाति से जुड़ा है, तो अवसरवादी नेताओं को राजनीति करने का मौका भी मिल गया है। सपा-कांग्रेस के नेताओं में मामले को तूल देने के साथ पीड़ित परिवार से मिलने की होड़ सी लगी हुई। फिलहाल पुलिस क्षेत्र के शांति बनाए रखने के लिए सतर्क है।
अपराध छोटा हो या बड़ा सबके लिए कानून है, लेकिन जिनके कंधों पर कानून बनाए रखने की जिम्मेदारी है, अक्सर उन्हीं की लापरवाही के चलते बड़ी घटनाएं हो रही हैं। विनोद कुमार साहनी की हत्या के मामले में भी यही बात सामने आ रही है। समय रहते अगर परसपुर पुलिस व साइबर सेल की टीम ने विनोद साहनी पर कानूनी कार्रवाई की होती, तो शायद इतनी बड़ी घटना न घटती।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही विनोद साहनी की ब्राह्मणों-ठाकुरों और हिंदू देवी-देवताओं के प्रति घृणित टिप्पणी यह बताने के लिए काफी है कि वह सवर्णों के प्रति कितना नफरती था। सहमति-असहमति जीवन का हिस्सा है। लेकिन किसी के प्रति अपशब्द व अमर्यादित आचरण अपराध है। परसपुर पुलिस और साइबर सेल की टीम ने ऐसे अपराध को नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम में एक का घर उजड़ गया तो दूसरे परिवारों के घरों की खुशियां छीन गईं।

विनोद साहनी चूंकि पिछड़े तबके से आता था, और आरोपी सवर्ण समाज से हैं तो घटना पर राजनीति होना स्वभाविक है। यह कोई नहीं बात नहीं है, ऐसा चलन काफी पुराना है। पिछड़ों में सवर्णों के प्रति नफरत भरना जातिवादी मानसिकता के लोगों की आदत रही है। तभी तो निषाद पार्टी के अध्यक्ष व योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद पीड़ित परिवार के बीच पहुंचकर धरना-प्रदर्शन भी किया। जबकि घटना की तह में जाएं तो घटना के पीछे पुलिस की लापरवाही तो है ही साथ में इसके लिए विनोद साहनी कम जिम्मेदार नहीं है।
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सवर्णों और हिंदू देवी-देताओं के प्रति घृणित व अमर्यादित टिप्पणी करने का अधिकार विनोद साहनी को न तो कानून देता है और न ही समाज। कुछ जातिवादी नेताओं के बहकावे में आकर मर्यादा भूलने वालों का सबक लेना होगा कि ऐसे कृत्यों से समाज में नफरत फैलती है और बाद यह कहकर कुकृत्यों पर परदा डाल दिया जाता है कि सवर्ण दलितों और पिछडों पर अत्याचार करते हैं। जबकि सच इसके उलट है। अक्सर ऐसी घटनाओं में देखा जाता है पिछड़े और दलित की आड़ में छिपे कुछ आसामाजिक तत्व समाज के विभेद पैदा करने के लिए हिंदू देवी-देवताओं व सवर्णों पर ओछी ठिप्पणी कर उन्हें उकसाने का काम करते हैं।

विनोद साहनी सरीखे अभी कई और हैं
गौरतलब है कि विनोद कुमार साहनी सरीखे अभी कई और ऐसे चेहरे हैं जो सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं और सवर्णों के प्रति जहर उगलते रहते हैं। उन्हें यह सोचना होगा कि उनकी यही हरकत समाज में घोलने का काम करती है। किसी से असहमत होना स्वभाविक है, लेकिन किसी को गाली देना अपराध है। कानून, समाज अगर ऐसे अपराधियों को नजरंदाज करेंगे, तो कोई इनकी हत्या कर कानून का गुनाहगार बन जाएगा। मर्यादा सबके लिए होती है, इसलिए सिरफिरा दायरे में रहने की कोशिश होनी चाहिए। क्योंकि समाज में जितना अधिकार पिछड़ों-दलितों को है उतना ही सवर्णों को भी है। एक-दूसरे को नीचा दिखाकर कोई बड़ा नहीं हो सकता।
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