कायर जज कहलाने से बेहतर है मर जाऊं, 5 महीने में 23वीं फांसी की सजा सुनाने वाले एडीजे रवि कुमार दिवाकर का छलका दर्द
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रवि कुमार दिवाकर ने महज पांच महीनों के भीतर 23वीं मौत की सजा सुनाकर न्यायिक इतिहास में एक बड़ा फैसला दिया है। 7 सितंबर को उन्होंने जुलाई 2018 के एक चर्चित दहेज हत्या मामले में अभियुक्त मोहम्मद नदीम को अपनी पत्नी शाहजादी पर केरोसिन छिड़ककर जिंदा जलाने का दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इस वारदात को बेहद क्रूर और बर्बर करार देते हुए इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर (विरलतम से विरलतम) श्रेणी में रखा।
मरणासन्न बयान बना फांसी का आधार
मामले की सुनवाई के दौरान शाहजादी के माता-पिता समेत अभियोजन पक्ष के कई प्रमुख गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे और उन्होंने दहेज प्रताड़ना के आरोपों का खंडन कर दिया था। इसके बावजूद एडीजे दिवाकर की अदालत ने मृतका के मरणासन्न बयान (Dying Declaration) को ही निर्णायक और सबसे मजबूत साक्ष्य माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृतका के बयान से नदीम की सीधी भूमिका पूरी तरह साबित होती है, इसलिए गवाहों के पलटने का आरोपी को कोई फायदा नहीं मिलेगा।
गैंगस्टर की धमकी और सिस्टम के दबाव पर उठाए गंभीर सवाल
फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में माफिया और गैंगस्टरों के दखल पर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामलों को दबाव बनाकर लंबा खींचने या वापस लेने के प्रयास किए जा रहे हैं। दिवाकर ने खुलासा किया कि उनके कोर्ट से कुछ आपराधिक फाइलें वापस लिए जाने के बाद एक गैंगस्टर ने उन्हें संदेश भिजवाकर धमकी दी थी। धमकी में कहा गया था कि यदि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी की या बात आगे बढ़ाई, तो उनका तबादला किसी दूसरे कोर्ट या जिले से बाहर करा दिया जाएगा।
माता-पिता ने माफिया से डरना नहीं सिखाया
धमकियों का कड़ा जवाब देते हुए जज दिवाकर ने कहा, मेरे माता-पिता ने मुझे सिर्फ ईश्वर से डरना सिखाया है। अगर मैं माफिया से डर गया तो न्यायपालिका पर जनता का भरोसा टूट जाएगा। कायर जज कहलाने से बेहतर है कि मैं मर जाऊं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हुए ही न्यायिक सेवा में रहेंगे और जिस दिन ऐसा करना मुमकिन नहीं होगा, वह इस्तीफा दे देंगे।
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ज्ञानवापी सर्वे से लेकर सीजेएम उत्तम आनंद हत्याकांड का किया जिक्र
गौरतलब है कि रवि कुमार दिवाकर वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे का आदेश देने के बाद से ही सुर्खियों में आए थे। उन्होंने बताया कि उस फैसले के बाद से उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने के बजाय उसे और कम कर दिया। अपने बयान में उन्होंने चित्रकूट के अब्बास अंसारी प्रकरण, बरेली के तौकीर रजा मामले के साथ-साथ 1982 में हाईकोर्ट जज सीपी सिंह, 2001 में लखीमपुर सीजेएम बलराम और 2021 में धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की हत्याओं का जिक्र करते हुए जजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
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