Basti News: नारी सशक्तिकरण के दावों पर सवाल, शिक्षिका पत्नी की जगह पति ने फहराया तिरंगा, उठ रहे गंभीर सवाल
Basti News: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहाँ पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा था, वहीं उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से प्रशासनिक व्यवस्था और नारी सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जनपद के कप्तानगंज विकास खंड मुख्यालय पर 80वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के आधिकारिक समारोह के दौरान निर्वाचित महिला ब्लॉक प्रमुख की जगह उनके पति भोला निषाद ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाते हुए ध्वजारोहण कर दिया। पेशे से सरकारी परिषदीय स्कूल में शिक्षक भोला निषाद की इस हरकत ने शासन-प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी खलबली मचा दी है।
सरकारी तंत्र की मौन सहमति और सरपंच पति कल्चर का दबदबा
विकास खंड कप्तानगंज में सरकारी नियमों और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का यह कोई पहला मामला नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, निर्वाचित महिला प्रतिनिधि को दरकिनार कर उनके पति द्वारा ब्लॉक की कमान संभालना और सरकारी कार्यक्रमों में मुख्य भूमिका निभाना एक परिपाटी बन चुका है। हैरत की बात यह रही कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम से खंड विकास अधिकारी (BDO) भी नदारद रहे। बताया जा रहा है कि कई ब्लॉक का प्रभार होने का हवाला देकर अधिकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद बिना किसी झिझक के शिक्षक पति ने ही राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया।
बेसिक शिक्षा विभाग की चुप्पी और कार्रवाई पर संशय
एक तरफ जहाँ एक तरफ बेसिक शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक सरकारी शिक्षक किसी भी गैर-शैक्षणिक या राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रहने के लिए बाध्य हैं, वहीं परिषदीय विद्यालय में तैनात शिक्षक भोला निषाद खुलेआम ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में समानांतर सत्ता चला रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सब कुछ जानते हुए भी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और उच्च प्रशासनिक अधिकारी मामले में कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। विभागीय अफसरों की इस चुप्पी पर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं।
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दूरगामी परिणामों की चेतावनी और जनता में आक्रोश
स्वतंत्रता दिवस के मंच से सामने आई इस घटना ने न केवल सरकार की ‘मिशन शक्ति’ और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के क्रियान्वयन पर गहरा धक्का दिया है, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर भी गलत संदेश भेजा है। कप्तानगंज क्षेत्र में इस ‘नकली प्रमुख’ संस्कृति को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक कागजों पर चुनी गईं महिला प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन उनके परिजनों द्वारा किया जाता रहेगा और जिम्मेदार अधिकारी कब इस पर सख्त कदम उठाएंगे।
रिपोर्ट- कर्मचंद्र यादव
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