अखंड भारत स्वप्न नहीं संकल्प हमारा

Akhand Bharat, India Independence

अखंड भारत स्वप्न नहीं संकल्प हमारा,
कटते गए सिमटते गए क्यों बने बेचारा।
वे सब कमियाँ अपनी खोजो याद करो,
जीवन्त राष्ट्र को कोई और नहीं है चारा।।

हम शक्ति सामर्थ्य सम्पन्न राष्ट्र दुनियां के,
बागडोर समर्थ हाथों ने संभाली कस कर।
विघ्न विनायक गद्दारों को सुपथ दिखाएं,
भारत के गले मिलेगा संपूर्ण विश्व हंसकर।।

हम सभी सनातन हैं विश्वास अटल हो,
भारतवासी जो भी हैं सभी भरत पुत्र।
दुविधा भ्रम से सभी मुक्त हों व्रत मेरा,
मशाल जलाएं सनातनी हम एक सूत्र।।

पंद्रह अगस्त स्वतंत्रता का ध्वज लहराएं,
घर घर गली गली में तिरंगा हम फहराएं।
मन का संकल्प सूत्र बद्ध होगा जीवन में,
वंदे मातरम एकांत्म स्वर से सब जन गायें।।

– बृजेंद्र पाल सिंह

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