सुल्तानपुर हाईवे पर ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से बाराबंकी के 4 मजदूरों की मौत
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोसाईंगंज इलाके में शनिवार तड़के एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने चार हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। सुबह करीब 4:45 बजे गंगागंज के समीप सुल्तानपुर हाईवे पर ईंटों से लदी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि ट्रॉली पर सवार चार मजदूर भारी-भरकम ईंटों और लोहे के ढांचे के नीचे बुरी तरह दब गए।
हादसे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और तुरंत पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही गोसाईंगंज पुलिस, फायर सर्विस और एनएचएआई (NHAI) की राहत टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। भारी मशक्कत के बाद हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से पलटी हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली को सीधा कराया गया और ईंटों के मलबे में दबे चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया।
ट्रॉमा सेंटर ले जाते समय चौथे मजदूर ने तोड़ा दम
रेस्क्यू टीम ने तुरंत सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद तीन मजदूरों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अत्यंत गंभीर रूप से घायल चौथे मजदूर को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही जिंदगी और मौत से जंग लड़ते हुए उसने भी दम तोड़ दिया।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान बाराबंकी जिले के निवासी संदीप रावत (25 वर्ष), पीतांबर रावत (35 वर्ष), पवन रावत (25 वर्ष) और बलराम रावत के रूप में हुई है। ये चारों मजदूर मेहनत-मजदूरी करके अपने-अपने परिवार का पेट पालते थे। एक ही झटके में चार नौजवानों की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया और चारों घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए।
इसे भी पढ़ें: पीएम मोदी का 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग समेत किए कई बड़े ऐलान
गोसाईंगंज पुलिस ने चारों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके परिजनों को रोते-बिलखते मौके पर पहुंचने की सूचना दे दी है। पुलिस इस बात की जांच में जुट गई है कि हादसा किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर चालक को झपकी आने की वजह से ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित हुई। इस दुखद घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने सुचारू करवा दिया है।
इसे भी पढ़ें: अभूतपूर्व संकट में उच्च शिक्षा
