BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से हार गए जिंदगी की जंग

Uma Shankar Singh passed away

Uma Shankar Singh passed away: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आई है। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले बसपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। उमाशंकर सिंह पिछले लगभग दो वर्षों से घातक बीमारी कैंसर से जंग लड़ रहे थे। उनका इलाज दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूर्वांचल से लेकर लखनऊ के राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई है।

साधारण किसान परिवार से पूर्वांचल में बने बसपा का सबसे बड़ा चेहरा

उमाशंकर सिंह को पूर्वांचल की राजनीति में बसपा का सबसे मजबूत और भरोसेमंद स्तंभ माना जाता था। उनका जन्म 2 जनवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के खनवर गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की और बाद में बलिया के कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उमाशंकर सिंह का सार्वजनिक जीवन से जुड़ाव छात्र राजनीति के दिनों से ही शुरू हो गया था।

छात्र राजनीति से जिला पंचायत अध्यक्ष और फिर विधानसभा तक का सफर

छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाने के बाद उमाशंकर सिंह ने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। साल 2000 में वे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते और इसके बाद बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष बने। जिला पंचायत में अपने जमीनी काम के दम पर उन्होंने क्षेत्र की जनता के बीच गहरी पैठ बनाई, जिसके बाद बसपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया।

2012, 2017 और 2022 में बीजेपी की प्रचंड लहर में भी बचाया बसपा का किला

उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए। उन्होंने पहली बार 2012 में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 और फिर 2022 के विधानसभा चुनावों में, जब पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड लहर थी, तब भी उमाशंकर सिंह ने अपने व्यक्तिगत प्रभाव और क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के दम पर अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा।

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उल्लेखनीय है कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जब बसपा का पूरे प्रदेश में लगभग सूपड़ा साफ हो गया था, तब उमाशंकर सिंह ही अपनी रसड़ा सीट बचाने में कामयाब रहे थे और उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के अकेले प्रतिनिधि (इकलौते विधायक) बने थे।

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