संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी, दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे दुनिया के 13 देश

Hunger Report

रोम: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती खाद्य असुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। हंगर हॉटस्पॉट्स रिपोर्ट के अनुसार, जून से नवंबर 2026 के बीच 13 देशों में लाखों लोगों के लिए स्थिति और विकट हो सकती है।

सूडान, यमन, फिलिस्तीन और साउथ सूडान सबसे गंभीर श्रेणी में

खाद्य संकट के खिलाफ वैश्विक नेटवर्क (जीएनएएफसी) की वर्ष में दो बार आने वाली इस रिपोर्ट में सूडान, साउथ सूडान, यमन और फिलिस्तीन को भूख की गंभीरता और बड़े पैमाने के मामले में सबसे अधिक चिंताजनक हॉटस्पॉट बताया गया है। इन क्षेत्रों में हिंसा और संघर्ष खाद्य संकट की मुख्य वजह बने हुए हैं।

नाइजीरिया और सोमालिया में अकाल का गंभीर खतरा

रिपोर्ट में नाइजीरिया को सबसे अधिक चिंता वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है। अनुमान है कि बोर्नो राज्य के कुछ इलाकों में लोगों को खाद्य असुरक्षा की विनाशकारी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जहां भुखमरी, मौत, अत्यधिक गरीबी और गंभीर कुपोषण जैसी समस्याएं उभर सकती हैं। वहीं, सोमालिया के खाड़ी क्षेत्र के बुरहाकाबा जिले की आबादी भी अकाल के गंभीर खतरे का सामना कर रही है।

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संघर्ष, आर्थिक झटके और फंडिंग में गिरावट ने बढ़ाया संकट

रिपोर्ट के अनुसार, इन 13 में से 12 हॉटस्पॉट पर लड़ाई और हिंसा का सबसे बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा, आर्थिक झटके, फंडिंग में भारी कमी और एल नीनो से जुड़े बढ़ते खतरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अनुमानित एल नीनो घटना के कारण इन देशों में असमान बारिश, सूखा और बाढ़ आने की आशंका है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि 2022 से 2025 के बीच संकटग्रस्त क्षेत्रों में खाद्य सहायता, आपातकालीन कृषि सहयोग और पोषण संबंधी राहत के लिए मिलने वाली फंडिंग में लगभग 59 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जो करीब एक दशक पुराने स्तर पर पहुंच गई है।

266 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में

फंडिंग में इस गिरावट के कारण प्रभावित देशों में गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे लोगों की संख्या बढ़कर लगभग 266 मिलियन हो गई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष, पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के प्रकोप जैसी घटनाओं से लोगों की आजीविका, बाजारों की कार्यप्रणाली और मानवीय सहायता तक पहुंच में और बाधाएं आ सकती हैं।

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